एक तरफ जहां डिपार्टमेंटल स्टोर पर बीयर बेचने पर घमासान चल रहा है। वहीं, आबकारी विभाग के आयुक्त पंकज शर्मा ने सरकार के इस फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार का यह कदम उच्च मात्रा से कम मात्रा वाले हानिरहित अल्कोहल को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीतिगत पहल का हिस्सा है। बीयर में 5 फीसदी अल्कोहल है, जबकि बाकी में 65 से 75 फीसदी है। सरकार की कोशिश है कि अधिक अल्कोहल लेने वाले कम अल्कोहल लें।
पंकज शर्मा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में पिछले साल 90 लाख बोतल बीयर की बिकी थीं। इस साल सितंबर तक 82 लाख बीयर की बोतलें बिक चुकी हैं। प्रदेश में बीयर बिकने का समय सुबह 9 बजे से लेकर रात 11 बजे तक होता है। ऐसे में हर रोज 14 घंटे बीयर की बिक्री देखी जाए तो हर घंटे करीब 2 हजार बीयर की बोतलें बिकती हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की बीयर अच्छी गुणवत्ता वाली है। इसलिए हर साल यहां से बाहर 700 करोड़ रुपये की बीयर जाती है, क्योंकि राज्य का वातावरण यहां देश की बेस्ट बीयर बनाने में सहयोग करता है।
शराब माफिया को लाइसेंस देने की बात गलत
आयुक्त ने कहा है कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है कि शराब माफिया को हमने लाइसेंस दिए हैं। जम्मू-कश्मीर में सभी 279 लाइसेंस डोमिसाइल वालों को ही जारी किए गए हैं। इससे अब तक की आबकारी नीति के हिसाब से सबसे अधिक 217 करोड़ रुपये का राजस्व आया है। पिछले वित्त वर्ष में मात्र 123 करोड़ रुपये आए थे। उन्होंने कहा कि हमने मौजूदा वर्ष के लिए आबकारी नीति के तहत 655 लाइसेंस जारी किए हैं। इनमें 250 लाइसेंस बार, होटल, क्लब, बैंक्वेट हॉल क्लब को जारी किए हैं, जबकि 279 शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए हैं।
इस साल रिकॉर्ड कमाई होने की उम्मीद
आबकारी विभाग की नई नीति सरकार को खूब मालामाल कर रही है। जानकारी के अनुसार इस साल विभाग को आबकारी नीति के तहत 1900 करोड़ रुपये का राजस्व आने की उम्मीद है। पिछले साल यह आंकड़ा 1773 करोड़ रुपये था और वर्ष 2020 में मात्र 1200 करोड़ रुपये था।
देसी के आगे कहीं नहीं टिकती अंग्रेजी
जम्मू-कश्मीर में देसी शराब पीने वालों की सबसे अधिक संख्या है। जेके स्पेशल व्हीसकी इस साल सितंबर तक 1.06 करोड़ बोतलें बिकी हैं, जबकि अंग्रेजी शराब की 53 लाख बोतलें ही बिकी हैं। आयुक्त का कहना है कि हमने पर्यटन स्थलों पर अधिक फोकस किया है। क्योंकि पर्यटक छुट्टियां मनाने वहां आते हैं। उनको परेशानी न हो, इसके लिए पर्यटन स्थलों पर बार आदि के लाइसेंस दिए जा रहे हैं।
नशे की अवैध फसल पर कार्रवाई
आबकारी विभाग आयुक्त पंकज शर्मा ने जानकारी दी है कि इस वर्ष अब तक 625 एकड़ पर लगी नशे की अवैध फसल को नष्ट किया गया है। जबकि एक लाख अवैघ शराब भी नष्ट की गई है। उनका कहना है कि सरकार का मकसद है कि अवैध शराब से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए। विभाग एक ई आबगारी पोर्टल भी लांच करने जा रहे है।