अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जलशक्ति विभाग के टैंकरों में लीकेज से सड़कों पर दावों का रिसाव हो रहा है। भीषण गर्मी में लोग पानी की कमी से परेशान हैं तो सरकारी टैंकर सड़कों की प्यास बुझा रहे हैं। अधिकारियों की अनदेखी के कारण जल ही जीवन का नारा बस नारा रह गया है, क्योंकि दो साल से टैंकरों की मरम्मत नहीं हो पाई। ऐसे में मोहल्लों में पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही।
दरअसल, जलशक्ति विभाग के पास गर्मी में पेयजल किल्लत दूर करने के लिए 22 टैंकर हैं। शिकायतें आने पर टैंकरों को मोहल्लों में भेजा जाता है। रोजाना एक टैंकर सात चक्कर लगाता है। 22 टैंकरों की क्षमता 7.20 लाख लीटर पानी की है, लेकिन लीकेज के कारण 1.32 लाख लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। लोगों के हिस्से 5.88 लाख लीटर पानी ही आ रहा है। विभाग के पास चार हजार लीटर के दस टैंकर है, जिसकी क्षमता 2.40 लाख लीटर और आठ हजार लीटर के 12 टैंकरों की 4.88 लाख लीटर है। घरों तक 3500 और 7500 लीटर ही पानी पहुंचता है। विभाग के अनुसार टैंकरों को ठीक करवाने के लिए बीते साल भी 20 लाख रुपये का एस्टीमेट भेजा था, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली। इस कारण मरम्मत का काम रुका है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है और रोजाना हजारों लीटर पानी सड़कों पर बह रहा है।
वार्ड में पहुंचने से पहले पानी आधा रह जाता
नेता विपक्ष द्वारका नाथ ने बताया कि टैंकरों से आधा पानी लीक हो जाता है। गर्मी में पीने को पानी नहीं मिलता। सड़कों में पानी व्यर्थ बह रहा है। मरम्मत होनी चाहिए। वार्ड-28 के पार्षद गौरव चोपड़ा ने कहा कि गर्मी में कॉल करने पर टैंकर नहीं आते। अगर आ भी जाएं तो पानी रास्ते में ही बह जाता है। लोगों के हिस्से पानी कम आता है। वार्ड-73 के पार्षद प्रो. युद्धवीर सिंह के अनुसार टैंकरों की मरम्मत होनी चाहिए।
कपड़े बांधे तो किसी पर लगाई बोतल
विभागीय कुप्रबंध की बात करें तो पानी की लीकेज रोकने के लिए कहीं पर कपड़े बांधे हैं तो किसी टैंकर पर प्लास्टिक की बोतलें लगाई गई हैं। कुछ टैंकरों के ऊपर से ढक्कन ही अलग हो गए हैं। इस कारण पानी बहता रहता है। यही नहीं, टैंकर भी काफी पुराने हैं। विभाग नए टैंकर खरीद नहीं पाया। हर बार गर्मी में टैंकरों की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। हाल ही में 24 से ज्यादा टैंकरों को समयावधि पूरी होने के बाद बंद कर दिया था।
विभागीय कुप्रबंध की बात करें तो पानी की लीकेज रोकने के लिए कहीं पर कपड़े बांधे हैं तो किसी टैंकर पर प्लास्टिक की बोतलें लगाई गई हैं। कुछ टैंकरों के ऊपर से ढक्कन ही अलग हो गए हैं। इस कारण पानी बहता रहता है। यही नहीं, टैंकर भी काफी पुराने हैं। विभाग नए टैंकर खरीद नहीं पाया। हर बार गर्मी में टैंकरों की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। हाल ही में 24 से ज्यादा टैंकरों को समयावधि पूरी होने के बाद बंद कर दिया था।