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चल चलचे बसंतगारे गी गाने में बसंतगढ़ की खूबसूरती को दर्शाया गया

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जम्मू। दर्पण प्रोडक्शन दर्शकों के सामने चल चलचे बसंतगारे गी ’गाने के साथ आए हैं। गीत के सुंदर बोल जयदेव परदेसी द्वारा लिखे गए थे, जो एक प्रसिद्ध डोगरी लेखक थे, जिन्होंने इस गीत को 35 साल पहले लिखा था। जयदेव प्रधान ने कहा कि बासगढ़गढ़ के पहाड़ी क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव है। यह स्थान सार्वजनिक और पर्यटन क्षेत्र के हिसाब से काफी सुंदर है। उन्होंने कहा कि यह गीत लोगों को इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को सामने लाएगा। गीत में सुंदर प्राकृतिक संसाधनों और बसंत गढ़ के प्राकृतिक क्षेत्र को दर्शाया गया है। दिव्य वृक्ष देवदार जो प्राचीन भारतीय ऋषियों का पसंदीदा निवास स्थान था जो भगवान शिव को समर्पित थे। सघन वनों के बीच स्थित, बसंतगढ़ प्रकृति प्रेमियों और यात्रियों के लिए एक मनोरम क्षेत्र है। गाने का निर्माण और निर्देशन मालुप सिंह कर रहे हैं। रचनात्मकत टीम में पिछले कुछ वर्षों से उनके संबंधित क्षेत्रों में प्रमुखता शामिल है। इनमें साहिल लकी (संगीत), सुरेश चौहान (गायक), नीरज बड्याल (संपादक) शामिल हैं
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