जम्मू संभाग के जिला संबा के रामगढ़ में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के निकट बाबा दलीप सिंह मन्हास की दरगाह (बाबा चमलियाल) पर गुरुवार को मेले का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जहां दुकानें सज गई हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर सहित पंजाब, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो चुका है।
प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। भारत-पाकिस्तान के संबंधों में जारी खटास के चलते लगातार सातवें साल भी पाकिस्तानी श्रद्धालुओं को शर्बत और शक्कर नहीं दी जाएगी। बाबा की मजार में स्थित तालाब की मिट्टी को शक्कर और कुएं के पानी को शर्बत कहा जाता है। मान्यता है कि दोनों को मिलाकर लेप करने से चर्म रोग ठीक होते हैं। पाकिस्तानी श्रद्धालु मजार की शक्कर व शरबत लेने के लिए सालभर इंतजार करते हैं।
जानें बाबा चमलियाल मेले का इतिहास
बताया जाता है कि करीब तीन सौ साल पहले गांव दग में बाबा दलीप सिंह मन्हास रहते थे। वह चंबल व चर्म रोग का इलाज करते थे। बाबा दलीप सिंह की मशहूरी बढ़ती देख कुछ लोगों ने बाबा को मारने की ठान ली। एक दिन बाबा को उन्होंने इलाज के बहाने सैंदावाली गांव (अब पाकिस्तान में) बुलाया। बाबा घोड़े पर सैंदवाली जा रहे थे तो गांव से कुछ दूरी पर कुछ लोगों ने घात लगा वार कर बाबा की गर्दन काट दी। गर्दन वहीं गिर गई।
घोड़ा बाबा का बिना गर्दन शरीर ले कर दग गांव पहुंचा तो वहां एक महिला कुंए से पानी भर रही थी। यहां बाबा का शरीर भूमि में समा गया। इस जगह पर आज दरगाह है। बाबा का घोड़ा भी वहीं समा गया था। इसके बाद एक रात बाबा ने अपने एक भक्त को दर्शन दिए व कहा कि आमुक स्थान पर बने तालाब की मिट्टी शक्कर व कुंए के पानी की शरबत के लेप से पुराने से पुराना चर्म रोग का उपचार हो सकेगा। यहां अब बाबा की मजार है, जिसे बाबा चमलियाल के नाम से जाना जाता है।
पाकिस्तान से आती रही है चादर
यह भी कहा जाता है कि भारत-पाक के बंटवारे से पहले से वहां के श्रद्धालु बाबा की मजार पर चादर चढ़ाने आया करते थे। और शक्कर-शरबत ले जाते थे। बाद में हालात बिगड़ने पर पाक के श्रद्धालु केवल चादर ही भेजते हैं, जिसे भारतीय सुरक्षा बल के अधिकारी बाबा की मजार पर चढ़ाते हैं।
पाकिस्तान के सैंदाबाली में भी बाबा की मजार
बाबा की एक मजार पाकिस्तान के सैंदाबाली में भी है। पाकिस्तानी श्रद्धालु भी बाबा को मानते हैं। वहां मजार को बाबा दिलीप शाह के नाम से जाना जाता है। पाकिस्तान में मेला सप्ताह तक चलता है। बाबा चमलियाल मेले में जम्मू-कश्मीर के अलावा बाहरी राज्यों के लोग भी पहुंचते हैं और प्रसाद के रूप में शक्कर शरबत ले जाते हैं।