संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। पंजाबी लेखक सभा (पीएलएस) जम्मू की ओर से पंजाबी व्यंग्य लेखक डॉ. मोनोजीत की लिखी पंजाबी काव्य पुस्तक ''''किताब मूर्ति नहीं हुंदी'''' का विमोचन शुक्रवार को केएल सहगल सभागार में किया गया। यह काव्य पुस्तक 51 कविताओं का संग्रह है। पुस्तक में शामिल कविताएं समकालीन विश्व में जीवन स्थितियों में प्रचलित मूल्यों के प्रति डॉ. मोनोजीत की चिंता और सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त कुरीतियों पर उनके साहसिक व्यंग्यपूर्ण बयानों को दर्शाती हैं। अब तक डॉ. मोनोजीत ने जम्मू-कश्मीर के साहित्यिक जगत में 13 कविताएं और कथा पुस्तकों का योगदान दिया है। इस दौरान डॉ. राजवीर सिंह और डॉ. गुरप्रीत कौर ने पुस्तक में शामिल साहित्यिक सामग्री और विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
समारोह में जम्मू विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के पूर्व एचओडी प्रोफेसर बलजीत कौर मुख्य अतिथि और पंजाबी कथा लेखक कंवल कश्मीरी सम्मानित अतिथि रहे। प्रो. बलजीत कौर ने कहा कि डॉ. मोनोजीत ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली से जम्मू-कश्मीर के साहित्य को बड़े पैमाने पर समृद्ध किया है। वहीं, समारोह की अध्यक्षता करते हुए जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के पूर्व अतिरिक्त सचिव डॉ. अरविंदर सिंह अमन ने कहा कि पुस्तक में डॉ. मोनोजीत की कविताएं मानव जीवन में प्रेम के मूल्य के प्रति उनकी चिंता को दर्शाती हैं, जो जीवन स्थितियों के प्रत्येक पहलू और स्वयं को ईश्वर से जोड़ने के लिए आवश्यक है। कार्यक्रम में पंजाबी व्यंग्य लेखक डॉ. मंजीत सिंह, पीएलएस-जे के अध्यक्ष डॉ. बलजीत सिंह रैना, हरजीत सिंह उप्पल, रतन सिंह कंवल सहित बुद्धिजीवियों, लेखकों, विद्वानों और जम्मू विश्वविद्यालय के छात्रों और अन्य लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिमरनजीत सिंह ने किया। पंजाबी लेखक सभा जम्मू के प्रेस सचिव जंग एस. वर्मन भी मौजूद थे।