- भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बसे गांव चलेआरी में दो दोस्त मिलकर कर रहे सीप का कारोबार
- गांव के किसान से लीज पर भूमि लेकर ऑक्सीजनयुक्त तलाब में शुरू की खेती, 20 लाख रुपये से की शुरुआत
- सरकार की ओर से नहीं मिली मदद, लोगों को दिया रोजगार
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट बसे गांव चलेआरी में दो किसान सीप का कारोबार कर गांव को खजाने में तब्दील कर रहे हैं। चलेआरी गांव कभी पाकिस्तान की ओर से की जाने वाली गोला बारी में अधिक प्रभावित रहा है। पाक गोला बारी से इस गांव में काफी जानमाल नुकसान भी हो चुका है। इसी गांव के दो किसान राष्ट्रीय स्तर की खेती में अपना भाग्य आजमा रहे हैं।
यहां 65 वर्षीय देसराज जम्मू-कश्मीर पुलिस के सेवानिवृत्त उप-निरीक्षक हैं और 67 वर्षीय यशपाल भूविज्ञान और खनन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्होंने अपने गांव में एक किसान से लीज पर भूमि लेकर ऑक्सीजनयुक्त तालाब में पालने का काम शुरू किया है। किसान यशपाल ने बताया कि उनके दूसरे साथी देस राज को सीप की खेती करने का शौक था। उन्होंने मुझे इस कारोबार बारे में काफी बार कहा। मैं राजी नहीं हो रहा था। देस राज ने यू-ट्यूब पर इस कारोबार के बारे में जानकारी एकत्रित कर ली थी। हमने मन बनाया कि अपने गांव में सीप का कारोबार शुरू करेंगे। उन्होंने चंडीगढ़ में एक तालाब के बारे में पता लगाया वह चंडीगढ़ गए और एक महिला बैंक में अधिकारी थी उसके तालाब से जानकारी ली। इसके बाद हरियाणा के गांव मुरथल गए और वहां से जानकारी जुटाई।
सीप के कारोबार में जुटी एक कंपनी से संपर्क किया। इसके बाद उन्होंने गांव के एक किसान से भूमि लीज पर ली उसमें आक्सीजन युक्त एक तालाब बनवाया और कंपनी के जरिए कोलकाता से सीप का बीज मंगवाया। यह रेल मार्ग से जम्मू पहुंचा और वहां से इसे अपने गांव लेकर आए। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नही मिली है। सरकार रोजगार के साधन उपलव्ध करवाने के दावे तो कर रही है, लेकिन किसानों को ऐसे कारोबार के लिए सहायता नहीं कर रही है। हमने इस कारोबार में 20 लाख रुपये लगाए हैं। इसमें स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है। इसके 8 लाख रुपये जेसीबी, ट्रैक्टर व स्थानीय लोगों को लेबर के रूप में दिए हैं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष 2022 में कारोबार शुरू किया था, उनका माल आगामी सितंबर व अक्तूबर माह में तैयार हो जाएगा। इसके लिए कंपनी ही उनसे माल खरीदकर बेचेगी। उन्हें मुनाफा मिल जाएगा।
कभी भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर गोलाबारी की चपेट में रहा सांबा जिले का यह गांव अब शुद्ध मोतियों का खजाना बनने की राह पर है। दो दोस्त जीरो लाइन पर स्थित चलेआरी गांव में मोती की खेती करने के लिए साथ आए हैं। जम्मू-कश्मीर में यह अपनी तरह की पहली पहल है।