भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा के नौशेरा सेक्टर में सेना ने फिदायीन हमले की बड़ी साजिश को नाकाम कर हमले के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित आतंकी को पकड़ा है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेस-इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने पहली बार फिदायीन हमले के लिए नया हथकंडा अपनाकर फिदायीन को बिना हथियार घुसपैठ कराने की कोशिश की। इसे एलओसी में घुसपैठ के बाद हथियार और असलहा दिया जाना था, जिसके बाद फिदायीन हमले की साजिश थी।
आतंकी की पहचान 32 वर्षीय तबारक हुसैन निवासी गांव सब्जकोट कोटली पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। तबारक हुसैन पाकिस्तानी सेना के खुफिया विंग के लिए भी करता था। चौंकाने वाली बात है कि तबारक और उसके भाई हारून अली को अप्रैल 2016 में नौशेरा सेक्टर में ही घुसपैठ पर गिरफ्तार किया गया था। 26 महीने जेल में रहने के बाद दोनों भाइयों को वाघा-अटारी बॉर्डर से पाकिस्तान को लौटाया गया था।
एसएसपी राजोरी मोहम्मद असलम ने बताया कि एलओसी पर संदिग्ध हलचल दिखाई देने पर सेना ने घुसपैठिये को रोकने के लिए चेतावनी दी, लेकिन वह भागने लगा। इस दौरान उस पर फायरिंग की गई, जिसमें घायल होने पर तबारक को पकड़ लिया गया। उसे फौरन राजोरी स्थित सेना के अस्पताल शिफ्ट कर उपचार दिया जा रहा है। वहीं रक्षा सूत्रों ने बताया कि तबारक के शरीर के सभी बाल मुंडवाए हुए थे।
आत्मघाती हमला करने से पूर्व फिदायीन आतंकियों को इसी तरह से तैयार किया जाता है। किसी फिदायीन को बिना हथियार घुसपैठ कराने का यह पहला मामला है। ऐसे में समझा जा रहा है कि उसे प्रशिक्षित करने के बाद फिदायीन हमले के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया था। घुसपैठ के बाद उसे एलओसी पार कहीं से हथियार दिए जाने थे।
बिलखकर बोला - मैं मरने के लिए आया था, मुझे धोखा दे दिया
सेना ने जब तबारक को गिरफ्तार किया तो वो बिलखते हुए बोल रहा था - मैं मरने के लिए आया था, मुझे धोखा दे दिया। भाईजान मुझे यहां से निकालो। अधिकारियों ने बताया कि तबारक के शरीर के सभी बाल मुंडवाए हुए थे। आतंकी ऐसा फिदायीन हमले की तैयारी में करते हैं।