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Jammu News: बलोल में निवेशकों को आठ साल से नहीं मिल पा रही औद्योगिक जमीन

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- अतिक्रमण के कारण उद्योग और रोजगार को नहीं मिल पाया बढ़ावा
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अतिक्रमण के खिलाफ ढुलमुल रवैये का खामियाजा निवेशकों को भुगतना पड़ रहा है। यूटी प्रशासन औद्योगिक क्षेत्र में करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के दावे तो कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रस्तावों के अनुकूल उतनी भूमि ही उपलब्ध नहीं है और जो भूमि उपलब्ध है उस पर अतिक्रमण बड़ी चुनौती बना हुआ है। बलोल औद्योगिक एस्टेट की बात करें तो 2018 से अतिक्रमण के कारण कई निवेशकों को निवेश के बावजूद भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई।
बलोल खड्ड के पास स्थापित औद्योगिक एस्टेट में 522 कनाल औद्योगिक भूमि को वर्ष 2018 में चिह्नित कर उद्योग विभाग को हस्तांतरित किया गया था। इस बीच कोविड की दस्तक हो गई और दो साल इसमें ही निकल गए। लेकिन औद्योगिक भूमि पर एक विशेष समुदाय अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया, जिसे तत्काल हटाने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं की गई। उस समय बड़ी संख्या में निवेशकों ने निवेश करके लीज डीड आदि की प्रक्रियाएं पूरी कीं, लेकिन अतिक्रमण के कारण आज तक उन्हें औद्योगिक भूमि पर कब्जे नहीं मिल पाए। सांबा प्रशासन और पुलिस विभाग की सक्रियता के बाद बलोल औद्योगिक एस्टेट में करीब 150 कनाल भूमि को खाली करवा लिया गया है। लेकिन अभी भी सैकड़ों कनाल भूमि को वापस लेना बाकी है।
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ऐसे ही अतिक्रमण के कई मामले दूसरी औद्योगिक जमीनों पर भी हैं। वहां औद्योगिक बुनियादी ढांचे को स्थापित किया जाना बाकी है। जम्मू संभाग में निवेश प्रस्तावों की बात करें तो गत मार्च तक 1750 से अधिक निवेश प्रस्ताव आ चुके थे, जिनमें करीब 62000 करोड़ निवेश और करीब पौने दो लाख लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव है। इस सारी प्रक्रिया के लिए 34 हजार कनाल से अधिक भूमि की मांग की गई है, जो शायद ही इतनी जल्दी मिल सके। यही हाल कश्मीर संभाग का है।
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बीबीआईए ने अतिक्रमण हटाने की मांग की
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीबीआईए) के पदाधिकारियों ने बलोल औद्योगिक एस्टेट से अन्य औद्योगिक भूमि पर अतिक्रमण हटाने और मुक्त कराई गई करीब 150 कनाल भूमि को सिडको द्वारा शीघ्र निवेशकों को सौंपने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित महाजन ने कहा कि औद्योगिक भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है। भूमि की उपलब्धता से ही जम्मू कश्मीर में औद्योगिक निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। कई निवेशकों से 2018 से अपनी मेहनत की कमाई को जेएंडके सिडको के पास जमा कर दी थी, लेकिन उन्हें आज तक संबंधित भूमि पर कब्जे नहीं मिले हैं। अतिक्रमण के खिलाफ यूटी प्रशासन को गंभीरता से काम करना चाहिए।
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