संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू-कश्मीर की अपनी खेल नीति 2022 का कार्यान्वयन जम्मू-कश्मीर के खेल इतिहास में सबसे बड़ी बात रही है। यह नीति सरकारी नौकरियों के प्रावधान के अलावा, उत्कृष्ट खिलाड़ियों को उनके खेल कॅरियर को आकार देने में नकद सहायता और उनकी मदद के लिए अन्य प्रोत्साहन भी प्रदान करती है। यह बात जम्मू-कश्मीर की शीर्ष अंतरराष्ट्रीय फ़ेंसर श्रेया गुप्ता ने सोमवार को कुछ मीडिया एजेंसियों को संबोधित करते हुए कही।
तलवारबाजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पिछले दिनों उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से एक लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्राप्त करने वाली श्रेया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार प्रदेश के हर कोने में खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। श्रेया वर्तमान में एक जूनियर और सीनियर नेशनल चैंपियन है। ताइक्वांडो से तलवारबाजी तक की अपनी यात्रा को याद करते हुए श्रेया ने कहा कि ताइक्वांडो के साथ खेल करियर शुरू करने और अतुल पंगोत्रा से मूल बातें सीखने के बाद मैं एक छोटी बच्ची के रूप में अपने भाई और अन्य युवा तलवारबाजों को प्रशिक्षण करते देख तलवारबाजी के खेल में जाने के लिए प्रेरित हुई। जहां मैंने उज्जवल गुप्ता सर से बुनियादी बातें सीखीं, शोटू लाल सर, राशिद सर और विक्रम सर से प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
शेर-ए-कश्मीर और एस. रंगील सिंह अवार्डी श्रेया गुप्ता ने प्रदेश को अब तक 3 अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाया है, जिसमें राष्ट्रमंडल में दो और एशियाई खेलों में एक पदक के अलावा 18 राष्ट्रीय स्वर्ण पदक, 5 रजत और 7 कांस्य पदक शामिल हैं।
मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले यूटी प्रशासन और नुज़हत गुल के नेतृत्व वाले जेएंडके स्पोर्ट्स काउंसिल को श्रेय देते हुए श्रेया ने कहा कि सरकार द्वारा खिलाड़ियों को प्रदान की जाने वाली बुनियादी ढांचागत और अन्य संबद्ध सुविधाएं उन्हें उच्च स्तर पर और यहां तक कि उच्चतम स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करती हैं।
नवोदित खिलाड़ियों, जूनियर, सीनियर नेशनल और खेलो इंडिया यूथ गेम्स चैंपियन को एक संदेश में कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए कड़ी मेहनत ही एकमात्र मंत्र है। श्रेया ने कहा कि यदि आप ऊंचा लक्ष्य रखते हैं और उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, तो आप निश्चित रूप से इसे हासिल करेंगे, क्योंकि कड़ी मेहनत ही जीवन में सफल होने का एकमात्र मंत्र है। युवा खिलाड़ियों को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और उसे हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। लैंगिक समानता पर जोर देते हुए श्रेया ने कहा कि अपनी बच्चियों को अकादमियों और अन्य प्रशिक्षण केंद्रों में भेजने के बारे में माता-पिता की मानसिकता को बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर हैं। श्रेया ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्टता दिखाती हैं और पुरुषों के बराबर हैं। हमारी तलवारबाजी में, हमारे पास भारत में सिर्फ एक ओलंपियन है और वह भी एक महिला है। वह भवानी देवी हैं। तीन बार के ओलंपिक सेबर चैंपियन एरोन स्ज़िलागी शेर्या के पसंदीदा फ़ेंसर हैं, जबकि क्रिकेट आइकन एमएस धोनी उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं। श्रेया न कहा कि क्रिकेट के मैदान में एमएस धोनी को देखकर मैंने बहुत सी चीजें सीखी हैं, खासकर कठिन परिस्थितियों में कैसे संयमित रहना है और किसी भी तरह की स्थिति में कैसे शांत रहना है। मैं न तो जीत से खुश होता हूं और न ही हार से निराश होता हूं।