भारत भविष्य के इंजीनियरों को कॅरियर के लिए अपार अवसर प्रदान कर रहा है। साथ ही अनुसंधान, विकास, बुनियादी ढांचे और तकनीकी उन्नति में भी निवेश जारी है। ये बातें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने आईआईटी जम्मू में पांच दिवसीय फाउंडेशन प्रोग्राम के उद्घाटन सत्र में कहीं। उन्होंने 2023 बैच के छात्रों को आगे बढ़ने का मूलमंत्र दिया।
एलजी ने कहा कि आईआईटी जम्मू में विश्वस्तरीय फैकल्टी नई यात्रा पर निकलने वाली युवा प्रतिभाओं का पोषण करेगी। मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया पहल एक उभरते स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ मिलकर युवा मस्तिष्क को अपनी पहचान बनाने और इंजीनियरिंग में सफल कॅरियर बनाने में सहायता करेगी।
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे इंजीनियरों की जरूरत है, जो शहरीकरण, बुनियादी ढांचे और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा तक पहुंच की चुनौतियों का समाधान कर सकें। वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए विश्व स्तर पर सहयोग कर सकें। अन्य देशों और संस्थानों के साथ साझेदारी को बढ़ावा दे सकें। दुनिया की महानतम शक्तियां इस बात की गवाह हैं कि महान इंजीनियरों ने उन देशों को अद्वितीय ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जापान और अमेरिका जैसे देशों की इंजीनियरिंग कौशल ने उनके विकास में योगदान दिया है।
दुनिया में उनका दर्जा बढ़ाया है। उपराज्यपाल ने सुझाव दिया कि इंजीनियर सीमित दायरे तक न रहे। पाठ्यपुस्तकों से परे सोचें और चुनौतियों को अवसर के रूप में स्वीकार करें। मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया के मिशन को आगे बढ़ाने में युवा इंजीनियरों की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण होगी। उनके विचार और समाधान अधिक समावेशी और न्यायसंगत समाज का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में भारत आगे बढ़ रहा है। ज्ञान अर्थव्यवस्था द्वारा संचालित प्रौद्योगिकी और सेवा केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। उन्होंने छात्रों को दुनिया भर में हो रहे बदलाव के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशने और खुद का आविष्कार करते रहने की सलाह दी। इस मौके पर आईआईटी के निदेशक प्रो. मनोज गौड़, पद्म श्री डॉ. जनक पलटा, एसएमवीडीयू के वीसी प्रोफेसर प्रगति कुमार, आईआईएम जम्मू के निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय, एम्स जम्मू के निदेशक डॉ. शक्ति गुप्ता समेत अन्य भी उपस्थित रहे।
वास्तविकता को दर्शाने वाली शिक्षा प्रणाली बनाने का दिया सुझाव
एलजी ने शैक्षणिक संस्थानों को ऐसी शिक्षा प्रणाली बनाने का सुझाव दिया, जो आज की वास्तविकता को दर्शाती हो। नवाचार के उद्गम स्थल के रूप में विश्वविद्यालयों को प्रगति की रीढ़ बनने की जरूरत है। उद्योगों का सहयोग लेकर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। विश्वविद्यालय समाधान करने के कौशल से लैस स्नातक छात्रों को तैयार कर सकते हैं।