जम्मू। आईआईएम और आईआईटी में चार वर्षीय कोर्स करने के बाद छात्र सीधा पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे पहले की तरह मास्टर डिग्री से राहत दी गई है। सरकारी नियमों के तहत दाखिले में आरक्षण भी दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत संस्थानों के नियमानुसार छात्रों को लाभ मिलेगा। यह जानकारी बुधवार को आईआईएम के ओल्ड कैंपस में नई शिक्षा नीति 2020 की योजना के कार्यान्वयन पर आधारित प्रेस कांफ्रेंस में आईआईएम और आईआईटी के निदेशकों ने दी है। आईआईएम के निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत की बढ़ती विकासात्मक अनिर्वायताओं को संबोधित करना है।
प्रो. सहाय ने कहा कि 21वीं सदी की शिक्षा के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के अनुरूप नई प्रणाली तैयार की गई है। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की रचनात्मक क्षमता विकसित होगी। नई शिक्षा नीति को शुरू करने के साथ ही आईआईटी के साथ डिग्री प्रोग्राम (बी.टेक और एमबीए), एम्स के साथ हेल्थकेयर व हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन में एमबीए कार्यक्रम शुरू किया है।
बीटेक के छह सेमेस्टर पढ़ने के बाद आईआईटी में दो अंतिम सेमेस्टर पढ़ सकेंगे छात्र
आईआईटी के निदेशक प्रोफेसर मनोज सिंह गौड़ ने कहा कि बी.टेक जिन छात्रों ने छठे सेमेस्टर की पढ़ाई की है वे अपेक्षित योग्यता मानदंड को पूरा करने के बाद अंतिम दो सेमेस्टर के लिए आईआईटी में शामिल हो सकते हैं। उन छात्रों के लिए प्रावधान रखा है। सेंटर फॉर एसेंशियल स्किल्स (सीईएस) बाहरी लोगों को प्रशिक्षण देता है।