फोटो ई-मेल से भेजा है विश्व एथलेटिक दिवस पर विशेष अरुण जम्मू।जम्मू-कश्मीर में खेल को हमेशा से नजरअंदाज किया जाता रहा है।खेलों को बढ़ावा देने की बड़ी- बड़ी बाते करने वाली प्रदेश सरकार और स्पोर्ट्स काउंसिल और युवा सेवा और खेल विभाग मिल कर भी प्रदेश में बुनियादी खेल ढांचे का विकास करने में विफल रहे है। एथलेटिक को सभी खेलों की मां कहता है, इसमें विभिन्न प्रकार के खेल होते है। प्रदेश में एथलेटिक खेल की हालात यह है कि पुरे प्रदेश में एक भी सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक नहीं है। प्रदेश में 20 जिलों में एक भी सिंथेटिक ट्रैक नहीं हैं। हमारी खिलाड़ी आज भी मिट्टी के मैदानों पर अपनी तैयार करते थे, लेकिन अब इन मैदानों को भी खिलाड़ियों की बंद किया जा रहा है। जम्मू और कश्मीर संभाग में सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक की बनने की घोषणाएं तो हुई, लेकिन लंबे समय बाद भी प्रक्रिया टेंडर में अटकी पड़ी है। सरकार और विभागों की सुस्थ कार्यप्रणाली से युवाओं को बाहरी राज्यों में प्रशिक्षण लेना पड़ता है। 2017 एक सौ मिटर के नेशनल में सिलवर, 2018 में नार्थ जोन में सिलवर और 2019 में एक्ल प्रतियोगिता कांस्य पदक जीतने वाले धावक वासु सपोलियां वर्तमान में हिरयाणा में स्पोर्ट्स ऑथर्टि आफ इंडिया से प्रशिक्षण ले रहे। वासु कहते है 14 वर्ष की आयु से एथलेटिक से जुड़ा हुं। उन्होंने कहा जब हम कभी बाहरी राज्यों में खेलने जाते है तो हम में से अधिकांश खिलाड़ियों को यह पता नहीं होता है सिंथेटिक ट्रैक कैसे दौड़ना होता है। हमारे पास मैदान, बुनियादी ढांचे की कमी के साथ खिलाडियों को प्रोतसाहित करने की कमी है। हमारे पास कोच नहीं है बिना कोच के एथलेटिक की कल्पना नहीं की जा सकती है। एसोसिएशनों के प्रति काउंसिल का रवैया में सुधार की जरूरत एमेच्योर एथलेटिक एसोसएशन के अध्यक्ष सुनील महाजन ने कहा कि एथलेटिक्स खेल में बुनियादी ढांचे के बिना धावक को तैयार नहीं किया जा सकता है। जम्मू- कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल का रैवये भी अच्छा नहीं है। सिंथेटिक ट्रैक बनने की बाते केवल टेंडर और सरकारी कागजों में रह गई है।