जम्मू। कोविड, बजट का अभाव और मेयर के बदलाव की प्रक्रिया के कारण शहर का विकास नहीं हो पाया। ऐसे ही पांच साल निकलने वाले हैं। साथ ही स्थानीय निकाय चुनाव सिर पर हैं। विकास दावों तक ही सीमित रहा। प्रति वार्ड चार से पांच करोड़ चाहिए थे मगर एक करोड़ ही अलग-अलग हेड से मिले। इतने कम बजट में शहर की हालत में सुधार होना अपने आप में ही सवाल है। अब भी कई काम बिना बजट के अधर में हैं। सदन की बैठकों में 570 के करीब प्रस्ताव पास हुए। सिर्फ 80 प्रस्तावों का काम सिरे चढ़ पाया। 490 प्रस्ताव सचिवालय में अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। हाउस नियमित लगते तो कार्यों को गति मिलनी थी। कायदे से अक्टूबर 2018 से नगर निगम के गठन से लेकर अब तक 58 हाउस होने थे, पर सिर्फ 21 बैठकें हो पाईं। अब अगले माह निगम भंग होने जा रहा है।
नियम के अनुसार हर माह हाउस लगाने का प्रावधान है, पर 2018 से 2019 तक बजट का अभाव रहा। उस दौरान प्रति वार्ड पांच-पांच लाख रुपये मिल पाए। 2019 से 2021 तक कोविड के कारण हाउस नहीं लगा। 2022 में लगा तो सितंबर में मेयर के बदलाव का मसला हावी रहा। नवंबर में नया मेयर मिलते ही काम आरंभ हुआ। इस साल प्रति वार्ड को 90 लाख रुपये मिले जबकि सभी वार्डों में विकास के लिए 300 करोड़ चाहिए थे। अब चुनावी सरगर्मियां तेज होने के कारण हाउस का मुद्दा दब गया है।
... तो इसलिए ये दिक्कतें बार-बार आ रहीं
नाले इस बरसात में भी ओवरफ्लो हुए, पानी सड़कों पर आ गया। नालियों पर करोड़ों खर्च हुए मगर अवरुद्ध की दिक्कत दूर नहीं हो पाई। पार्कों की हालत में सुधार भी न के बराबर रहा। इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इसी तरह एलईडी लाइटें पूरी नहीं लग पाईं। 96 हजार में से 89 हजार लाइट ही लगी। दस हजार से ज्यादा लाइटें खराब हैं। अधिकांश वार्डों में पहले पड़ी टाइलों को नहीं हटाया गया। 2018 से जुड़े वार्ड 72, 73, 74 और 75 में कार्य नहीं हुए। सुभाष नगर (रिहाड़ी) के विपिन दत्ता के अनुसार वार्ड-26 में 2005 में टाइलें बिछी थी। अभी तक नई नहीं बिछ पाईं। दावा विकास का हो रहा है मगर लोग असुविधाओं से परेशान हैं। इसी तरह मोहन लाल ने दिक्कत साझा की। कहा- नगर निगम की ओर से कई साल पहले रास्ता बनाया था। तारकोल बिछाकर काम चलाया जा रहा है। टाइलें तक नहीं बिछ पाईं। बरसात में बार-बार रोड टूट रही है।
आवाज उठाई, नहीं हुई सुनवाई
वार्ड-55 के पार्षद प्रीतम सिंह, वार्ड-73 के युद्धवीर सिंह, 74 के सोबत अली व 28 के पार्षद गौरव चोपड़ा ने कहा कि विपक्ष की ओर से हर माह हाउस लगाने के लिए आवाज उठाई गई। मेयर का घेराव किया गया। खासतौर पर बताया कि 2005 के बाद चुनाव नहीं हुए। शहर के मसलों को हल करने के लिए हर माह हाउस लगाना जरूरी है। मगर मांग को अनसुना कर दिया। नेता विपक्ष द्वारका चौधरी ने कहा- हाउस नियमित लगते तो शायद शहर की हालत कुछ और होती। पूर्व मेयर चंद्र मोहन गुप्ता के अनुसार शुरुआती दौर में हर माह हाउस की बैठक हुई। कोविड के दौरान हाउस नहीं लगा। 2022 में नए मेयर ने कार्यभार संभाला। शहर में विकास कार्यों को गति दी गई।
हाउस नियमित लगाए गए। जनसमस्याओं को हल करवाया गया। किसी माह हाउस नहीं लगा तो एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक की जिससे शहर में बदलाव लाया गया।
- राजेंद्र शर्मा, मेयर
मेयर कार्यालय से आदेश मिलते ही हाउस लगाया गया। हाउस का फैसला मेयर लेते हैं। इसके बाद अन्य प्रक्रिया आरंभ होती है।
- परविंद्र कौर, सचिव, नगर निगम