- अब तक पीजीआई चंडीगढ़ भेजे जाते थे सैंपल, 40 दिन बाद मिलती है रिपोर्ट
- जम्मू-कश्मीर के साथ पंजाब के आठ जिलों के मरीजों को मिलेगा लाभ
- टेस्ट से मरीजों को दी जा रही दवा का असर का चलता है पता
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जीएमसी जम्मू में 15 जुलाई से एचआईवी वायरल लोड टेस्टिंग सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इससे जम्मू-कश्मीर के साथ पंजाब के आठ जिलों के एचआईवी संक्रमित मरीजों को लाभ मिलेगा। अब तक जम्मू-कश्मीर से वायरल लोड सैंपलों को पीजीआई चंडीगढ़ में भेजा जा रहा है, जिसमें 40 दिन के बाद रिपोर्ट मिल रही है। जीएमसी जम्मू में सुविधा शुरू होने पर चार से पांच दिन में रिपोर्ट मिल जाएगा, इससे पीड़ितों का इलाज और बेहतर हो सकेगा।
किसी भी एचआईवी संक्रमित मरीज को उपचार के दौरान वायरल लोड टेस्ट की जरूरत पड़ती है, जिसमें उसके वायरस क्षमता का स्तर देखकर उसे आगे का उपचार दिया जाता है। इसमें देखा जाता है कि उसे एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल सेंटर) सेंटर में जो दवाई दी जा रही है, उसका वायरस कम करने पर कितना प्रभाव हो रहा है। जम्मू-कश्मीर से हर हफ्ते करीब सौ सैंपल परीक्षण के लिए बाहर भेजे जा रहे हैं। प्रदेश में सरकारी स्तर पर मौजूदा कहीं भी एचआईवी वायरल लोड परीक्षण की सुविधा नहीं है। जीएमसी जम्मू की माइक्रोबायोलॉजी लैब में स्थापित अत्याधुनिक कोबास-आरटी-पीसीआर मशीन में एचआईवी वायरल लोड परीक्षण किए जाएंगे। इस मशीन में एक हफ्ते के भीतर परीक्षण के लिए दो बैच लगाए जाएंगे।
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जीएमसी जम्मू के माइक्रोबायोलाॅजी विभाग में एचआईवी वायरल लोड परीक्षण के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए दिल्ली से विशेषज्ञों की ओर से स्थानीय चिकित्सा टीम को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। जम्मू-कश्मीर एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से एचआईवी वायरल लोड परीक्षण के लिए किट उपलब्ध करवाई गई है।
- डाॅ. संदीप डोगरा, एचओडी, माइक्रोबायोलाॅजी विभाग
प्रदेश के चिकित्सा केंद्रों में 6411
एचआईवी संक्रमित पंजीकृत
जम्मू-कश्मीर के विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में 6411 एचआईवी संक्रमित पंजीकृत हैं। इनमें मौजूदा 3600 से अधिक एआरटी केंद्रों पर उपचार पा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक जीएमसी जम्मू में 5223 मरीज पंजीकृत हैं। 2817 एआरटी केंद्र पर उपचार पा रहे हैं। स्किम्स श्रीनगर में पंजीकृत 784 एचआईवी संक्रमितों में से 476 एआरटी केंद्र पर उपचार पा रहे हैं। एआरटी कठुआ में पंजीकृत 404 संक्रमित मरीजों में से 353 उपचार पा रहे हैं। प्रदेश में एड्स से पीड़ित 1522 मरीजों की मौत हो चुकी है।