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Har Ghar Tiranga : तिरंगे पर दिखेगी कश्मीरी कारीगरी की झलक, कुपवाड़ा में महिलाएं कर रही हैं क्रिवल कढ़ाई

Thu, 11 Aug 2022 04:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, कुपवाड़ा

सार

Har Ghar Tiranga :  कुपवाड़ा के छोटे से दो गांवों की महिलाएं हाथ से कढ़ाई कर राष्ट्रीय ध्वज बना रही हैं। यह स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा है। यह तिरंगे अलग हैं, क्योंकि इन पर बने अशोक चक्र को पारंपरिक कश्मीरी ‘क्रिवल’ कढ़ाई की कारीगरी का उपयोग करके बनाया गया है।
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विशेष कढ़ाई करती महिलाएं.. - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आतंकवाद और पत्थरबाजी के लिए सुर्खियों में रही कश्मीर घाटी में अब बदलाव की बयार बह रही है। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के छोटे से दो गांवों की महिलाएं हाथ से कढ़ाई कर राष्ट्रीय ध्वज बना रही हैं। यह स्वतंत्रता दिवस पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का हिस्सा है। यह तिरंगे अलग हैं, क्योंकि इन पर बने अशोक चक्र को पारंपरिक कश्मीरी ‘क्रिवल’ कढ़ाई की कारीगरी का उपयोग करके बनाया गया है। वहीं इन तिरंगों को बनाने वाली महिलाओं का कहना है कि वह अपने आपको खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें इन्हें बनाने का ऑर्डर मिला है।

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भारतीय सेना के सहयोग से शुरू की गई इस पहल के लिए कावारी और कुननपोशपोरा गांव में लगभग 50 महिलाएं एक साथ आगे आई हैं। यह महिलाएं दिन-रात तिरंगों को बनाने का काम कर रही हैं, क्योंकि इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। गांव में स्थापित किए गए सेंटर की प्रभारी नाजिमा समुंदरी ने कहा, मैं भारतीय सेना को धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने केंद्र स्थापित करने में मेरी मदद की। उन्होंने मुझे सिलाई मशीन और कच्चा माल जैसी सभी चीजें मुहैया कराई हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें बेहद गर्व है कि उन्होंने अपने काम की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज बनाकर की है। वह काफी खुश हैं और अपने आप को खुशकिस्मत मानती हैं। नाजिमा ने कहा कि इस पहल को शुरू करने के लिए सेना ने मुझे सब कुछ दिया। मैं दिन में लगभग 100 तिरंगे बनाती हूं। मैं 12 घंटे काम करती हूं और जब मैं घर पहुंचती हूं, तब भी आधी रात तक काम करती रहती हूं। बता दें कि इन महिलाओं को न केवल अपने हुनर को प्रदर्शित करने का अवसर मिला है बल्कि वह अपना रोजगार भी कमा रही हैं। 
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भारतीय सेना का किया धन्यवाद
इस सेंटर में काम करने वाली महिलाओं का कहना है कि वो दिल-ओ-जान से एक-एक तिरंगे की कढ़ाई कर रही हैं और उन्हें गर्व है कि उनके द्वारा बनाए गए तिरंगे घरों और कार्यालयों में लगाए जाएंगे। उनका यह भी कहना है कि हमारा एक सपना है कि हमारे हाथों से बनाए जाने वाले कश्मीरी कढ़ाई वाले पारम्परिक तिरंगे देश के हर कोने तक पहुंचे। एक शिल्पकार बिलकीस गुलजारी ने कहा कि हम इस तरह के महान काम से जुड़कर बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि वे भारतीय सेना की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने उन्हें पूरा सहयोग दिया। बिलकीस ने बताया कि हमारे इस सेंटर की शुरुआत ही तिरंगे बनाने से हुई है जोकि एक शुभ संकेत है।

देश के कोने-कोने तक पहुचें ये तिरंगे
बता दें, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के लिए देश भर में तिरंगे बनाए जा रहे हैं, लेकिन इन महिलाओं द्वारा बनाए गए तिरंगे सबसे अलग हैं। इन पर की गई हस्तकला उन्हें अलग करती है और यही एक कारण है कि इन तिरंगों की मांग बढ़ गई है। एक महिला एक दिन में एक या दो कढ़ाई वाले अशोक चक्र बना सकती है। एक शिल्पकार सबिया नजीर ने बताया कि राष्ट्रीय ध्वज पर हाथ की कढ़ाई करने का विचार हमारी सेंटर प्रभारी और सेना के एक कमांडिंग अफसर का था। हमें उन्हें बनाने का लक्ष्य दिया गया था और हम बनाना जारी रखेंगे। हम हर दिन हस्तकला से दो अशोक चक्र बनाते हैं। सबिया ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारी कारीगरी भारत के हर घर में पहुंचे। तिरंगे पर हमारी कारीगरी बहुत ही अनोखी है और यह पूरी तरह से हाथ की कारीगरी है।

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