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सरस मेला: हस्तशिल्प, पाक कला ने छोड़ी लोगों पर छाप आयोजन में 15 राज्यों की 220 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने सरस मेले में लिया भाग

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15 राज्यों की 220 से अ​धिक ग्रामीण महिलाओं ने सरस मेले में लिया भाग
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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। आजीविका, सशक्तिकरण और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उत्सव सरस आजीविका मेला का बाग-ए-बाहु में समापन हो गया। जम्मू कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (जेकेआरएलएम) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में 15 विभिन्न राज्यों की 220 से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया।
यह मेला आजीविका और सशक्तिकरण का उत्सव था, जो भारत के विभिन्न कोनों से हथकरघा, हस्तशिल्प और पाक कला में उत्कृष्ट शिल्प कौशल को उजागर करता था। आगंतुकों को उत्कृष्ट हथकरघा वस्त्र, जटिल हस्तशिल्प और क्षेत्रीय व्यंजनों की स्वादिष्ट श्रृंखला सहित उत्पादों की विविध श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिला।
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10 फरवरी को मेला शुरू हुआ था। समापन समारोह में मिशन निदेशक जेकेआरएलएम इंदु कंवल चिब ने कहा कि सरस आजीविका मेला ग्रामीण भारत की महिलाओं के लिए अपने कौशल और रचनात्मकता को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। जो उन्हें अपनी प्रतिभा और उद्यमशीलता की भावना को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह विभिन्न राज्यों को एक साथ आने, आपसी सीख को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक सद्भाव को बढ़ावा देने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
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एमडी ने अपनी उपस्थिति से इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव अटल डुल्लू का हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके समर्थन ने सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयुक्त सचिव आरडीडी डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि समुदाय में महिला सशक्तिकरण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सहयोगात्मक प्रयास और अटूट प्रतिबद्धता वांछित परिणाम प्राप्त करने में काफी मदद करेगी।
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