संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत गुम्मट बाजार की निर्माणाधीन दुकानों के मामले में प्रशासन और दुकानदारों के बीच कोई समाधान नहीं निकल पा रहा। दुकानदारों का कहना है कि दुकानें तोड़ने से पहले आसपास अस्थायी ठिकाना दिया जाए जबकि प्रशासन के अनुसार दुकानदार जगह खाली करें तो तीन महीने में दुकानें बना कर देंगे।
जानकारी के अनुसार गुम्मट बाजार में दुकानों में व्यापारी 30 दशक से काम कर रहे हैं। बाजार अब आबादी के हिसाब से तंग हो चुका है। प्रशासन स्मार्ट सिटी के तहत ऐतिहासिक गेट का सौंदर्यीकरण करना चाहता है जिसके आड़े में दुकानें आ रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि सभी दुकानें टूट जाती हैं तो बड़ी परेशानी होगी। अब हालात ऐसे हैं कि 15 दुकानें बनने के बाद काम रुक गया है क्योंकि नगर निगम 3.56 करोड़ से 8-10 साइज की 68 दुकानें बना रहा था, लेकिन ऐतिहासिक गेट से पहले 82 दुकानें हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए दुकानदारों ने रास्ता निकाला है कि पहले साइज अनुसार उतनी दुकानें दी जाएं। अभी तीन साइज 4-10, 6-10 व 8-10 में दुकानें हैं।
अस्थायी जगह पर काम करने की मिले जगह
राजकुमार 40 साल से दुकान और अशोक कुमार 1981 से ढाबा चला रहे हैं। प्रवीन सिंह 45 साल से चप्पल और कपड़े बेच रहे हैं। मोहिंदर पाल के दादा यहां पर दुकानदारी करते थे। रमेश 35 साल और रतन सिंह की छठी पीढ़ी काम कर रही है। सभी दुकानदारों ने कहा है कि घर का खर्च दुकानों पर निर्भर है। अगर कहीं अस्थायी जगह पर काम करने का अवसर मिल जाए तो कोई आपत्ति नहीं होगी।
दुकानदार जल्द दुकानें खाली कर दें तो तीन महीने में ही नई दुकानें अलॉट कर देंगे। किसी को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-राहुल यादव, आयुक्त, नगर निगम