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राज्यपाल सत्यपाल मलिक बोले- आतंकी सुरक्षाबलों के बजाय भ्रष्ट राजनेताओं को निशाना बनाएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Updated Sun, 21 Jul 2019 09:11 PM IST
Satya Pal Malik, Governor of Jammu and Kashmir - फोटो : ANI
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को एक विवादित बयान दिया। कहा कि आतंकियों को पुलिसकर्मियों व एसपीओ समेत अन्य निर्दोषों की हत्या नहीं करनी चाहिए। बल्कि भ्रष्ट राजनेताओं व ब्यूरोक्रेट को मारना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक उनके राज्य को लूटा है। वे रविवार को कारगिल में कारगिल लद्दाख पर्यटन महोत्सव में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने हथियार उठाया है वे अपने ही लोगों को मार रहे हैं। वे पीएसओ व एसपीओ को मार रहे हैं। आखिर उन्हें क्यों मार रहे हो? हत्या उसकी करो जिसने कश्मीर को लूटा है। क्या तुमने इसमें से किसी को मारा है? बंदूक से कभी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। श्रीलंका में लिट्टे जैसा संगठन भी खत्म हो गया। हिंदुस्तान में बंदूक से सरकार को कभी भी झुकाया नहीं जा सकता। सरकारों से ऐसे नहीं लड़ा जाता। बातचीत से तो सब कुछ हासिल किया जा सकता है। 

भ्रष्टाचार सबसे बड़ी बीमारी
उन्होंने कहा कि रियासत की सबसे बड़ी बीमारी भ्रष्टाचार है। अभी वह अमरनाथ यात्रा पर गए थे। वहां सैकड़ों टट्टू वालों के पास स्वेटर तक नहीं थे, लेकिन श्रीनगर में कई ऐसे नेता और अफसर हैं जिनके पास 15-20 कमरे के मकान हैं। करोड़ों रुपये के कालीन बिछे हुए हैं। वन विभाग तथा सिंचाई विभाग के कई सेवानिवृत्त अफसरों को वे जानते हैं जिनके महारानी बाग तथा बसंतकुंज जैसे पॉश इलाके में आलीशान बंगले हैं। यदि मेरे हाथ में होता तो इन पर मुकदमे चलाकर उनकी संपत्ति जब्त कर गरीबों में बांट देता।

उन्होंने कहा कि श्रीनगर के डाउनटाउन की गरीबी बताने के लिए उनके मुंह पर ताले लगे हुए हैं। लेकिन यहां के लोग अय्याश हैं, जिन्होंने कश्मीर को जलाया है। बड़े-बड़े खानदान वालों के पास बेहिसाब संपत्ति है। देश के अन्य शहरों के साथ विदेशों में मकान हैं। श्रीनगर के होटलों में हिस्सेदारी है। आपका रुपया खाकर ऐश कर रहे हैं। भोले भाले युवाओं को पत्थर थमाया है। उन्हें गुमराह किया है। उन्होंने मुख्यधारा के नेताओं पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि ये नेता दिल्ली में अलग भाषा बोलते हैं और कश्मीर में कुछ और बोलते हैं। ऐसे लोग दिल्ली में हमें डराते हैं और यहां लोगों को भड़काते हैं। 

तीन महीनों में दो-तीन मंत्री भ्रष्टाचार मामले में जमानत कराते मिलेंगे
राज्यपाल ने कहा कि बोफोर्स मामले में उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वे अपने शहर में गए तो उनके शायर मित्र ने इस लड़ाई पर यह शेर पेश की कि-हुजूर इनको कैसे पकड़ पाइएगा, बड़ी मछलियों के अलग समुंदर हैं। कहा कि विश्वास कीजिए जितने दिन वे यहां हैं, बड़ी मछलियां बच नहीं पाएंगी। अगले दो-तीन महीनों में दो-तीन पूर्व मंत्रियों सरीखे बड़ी मछलियों को जमानत कराते हुए आप पाइएगा। इस पर समारोह में तालियां बजीं तो उन्होंने कहा कि फिर यह तय कीजिएगा कि तालियां बजानी है या नहीं। 

 
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अब आजादी के नाम पर नहीं बल्कि जन्नत के नाम पर भड़काया जा रहा

मलिक ने कहा कि घाटी में पाकिस्तान के 100-125 आतंकी सक्रिय हैं। मुठभेड़ के दौरान इन्हें खत्म करने में दो से तीन घंटे लगते हैं, जबकि स्थानीय आतंकी तुरंत मर जाते हैं। इनके पास अच्छे हथियार भी नहीं होते हैं। अब इन्हें न तो आजादी और न ही आटोनॉमी के नाम पर भड़काया जा रहा है क्योंकि पता है कि ये दोनों चीजें मिलने वाली नहीं हैं। अब इन्हें जन्नत मिलने के नाम पर भड़काया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में दो जन्नत है। एक तो यहां की वादियां खुद ही जन्नत का अहसास कराती है दूसरी यहां विकास के बल पर जन्नत। उन्होंने आतंकवादियों से हिंसा का रास्ता नहीं अपनाने को कहा। 

कश्मीर के बदल रहे माहौल को आगे ले जाना है
राज्यपाल ने कहा कि कश्मीर का माहौल बदल रहा है। लोगों का स्वभाव बदला है। अब लोग समझदारी तथा आपसदारी की बात कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने कश्मीरी पंडितों को घाटी में बुलाने की बात की तो हुर्रियत प्रमुख ने भी कहा कि पंडितों को दोबारा घाटी में बुलाया जाना चाहिए। इस माहौल को आगे ले जाना है। साथ ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई भी जारी रखनी है।   

लड़ते लड़ते एक दिन बीमार हो जाऊंगा

राज्यपाल ने कहा कि भ्रष्टाचारियों से रोजाना लड़ाई होती है। लेकिन किस-किस से लड़ूं। एक दिन लड़ते-लड़ते वह बीमार हो जाएंगे। निवेदन किया कि जनता को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रेशर बनाना चाहिए। इससे पहले उन्होंने कहा कि डल झील का डीपीआर आठ महीने में नहीं बन सका। इस पर उन्होंने एक दिन पहले विभाग के कमिश्नर सेक्रेटरी को चेताया कि 15 दिन में डीपीआर नहीं बना तो वह अपनी छुट्टी कर लें। 

एक साल में बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं मिल पाई
राज्यपाल ने कहा कि एक सप्ताह बाद उनका एक साल का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस एक साल में उनके हिस्से में कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हाथ नहीं आई है। वजह भ्रष्टाचार है। इसमें शामिल अफसर धमकियां तक देते हैं। 

उमर ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि संवैधानिक पद धारण करने वाला एक जिम्मेदार व्यक्ति आतंकियों को भ्रष्ट नेताओं की हत्या करने को कह रहा है। इस प्रकार की गैरकानूनी हत्याओं तथा कंगारू कोर्ट की अनुमति देने से पहले कम से कम उन्हें अपने पद की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए।
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