जम्मू कश्मीर प्रशासनिक परिषद की बैठक लेते एलजी मनोज सिन्हा
- फोटो : संवाद
उधमपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) तीन साल में बनकर तैयार होगा। 2024-25 तक 325 करोड़ रुपये से इसका काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नया जीएमसी बनने पर जम्मू-कश्मीर में 100 एमबीबीएस सीटें बढ़ाई जाएंगी। इसके अलावा जम्मू और श्रीनगर में दो बीएससी नर्सिंग कालेजों के प्रशासनिक नियंत्रण को स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया गया है।
उप राज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय कुपवाड़ा और उधमपुर में दो नए मेडिकल कालेजों की स्थापना को मंजूरी पहले ही दे चुका है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के निर्माण पर 325 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है।
जीएमसी उधमपुर तैयार होने के बाद इसके आसपास के जिलों के मरीजों को भी इसका लाभ मिलेगा। जिला मुख्यालय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता से बेहतर चिकित्सा आपात प्रबंधन के साथ आईएमआर/एमएमआर में गिरावट आएगी।
वहीं वर्ष 2016 में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जम्मू व श्रीनगर में स्थापित नर्सिंग कॉलेजों में चिकित्सा पाठ्यक्रम के लिए शिक्षण संकाय स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा प्रदान किया जा रहा था। अब इन नर्सिंग कालेजों के प्रशासनिक नियंत्रण को प्रशासनिक परिषद ने स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है।
इस फैसले के बाद अब कालेजों की समस्त आय-व्यय का लेखा जोखा स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के बजट में होगा। विभाग इन कालेजों में प्रवेश, शिक्षण और डिग्री/डिप्लोमा प्रदान करने सहित विकास की जिम्मेदारी वहन करेगा।
- तदनुसार नामांकित छात्रों, संकाय और संबद मानव संसाधन के साथ सभी चल संपत्तियों के साथ दोनों कालेजों को स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध नियम को मंजूरी
जम्मू-कश्मीर में अनियमित जमा योजना प्रतिबंध नियम 2022 को अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम 2019 के तहत प्रशासनिक परिषद ने मंजूरी दी है। यह अधिनियम जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक व्यापक तंत्र प्रदान करेगा। यह अधिनियम अनियमित जमा योजनाओं के प्रचार, संचालन और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाता है। अधिनियम के तहत अब पुरस्कार चिट और धन संचलन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह अधिनियम सक्षम प्राधिकारी की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रावधानों व दायरे को निर्धारित करता है। इसमें सक्षम प्राधिकारी की शक्तियों को और मजबूती प्रदान की गई है।