अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एमबीबीएस और पैरा मेडिकल कोर्सों के लिए दिव्यांगता कोटे के तहत प्रवेश पाने को फर्जी दस्तावेज का मामला पिछले महीने सामने आ चुका है। उस दौरान दोनों उम्मीदवार तय मानकों में अयोग्य पाए गए थे।
अब एक और संदिग्ध केस राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में पहुंचा है। पता चला है कि उम्मीदवार कागजों में तो दिव्यांग है, पर बोर्ड के पैरामीटर में खरा उतरने से पहले ही जम्मू से कश्मीर चला गया। ऐसे में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा होने की आशंका है जिससे कॉलेज प्रशासन का सिरदर्द बढ़ गया है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार बीएससी नर्सिंग कोर्स के लिए श्रीनगर के उम्मीदवार को बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेस एग्जामिनेशन (बीओपीईई) के माध्यम से दाखिले के लिए भेजा गया। उम्मीदवार ने दिव्यांगता को आधार बनाकर दाखिले का दावा किया, लेकिन भौतिक तौर पर ऐसा नहीं पाया गया। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बिठाया। बोर्ड गठित होने के बाद उम्मीदवार श्रीनगर चला गया और किसी अस्पताल में भर्ती होने की बात कह रहा है। अगर ये उम्मीदवार भी दिव्यांगता में फर्जी पाया जाता है तो ऐसे तीन मामले हो जाएंगे। इससे पहले दो एमबीबीएस उम्मीदवार मेडिकल बोर्ड में दिव्यांगता में फर्जी पाए गए थे, जिनका मामला बीओपीईई के पास भेज दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने दोनों को अयोग्य करने की सिफारिश की है, जिससे सीटें रद्द हो सकती हैं। दोनों पुंछ निवासी है और बीओपीईई को इस पर अंतिम फैसला लेना है। जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि नए मामले में बीएससी नर्सिंग दाखिले के दावे के लिए उम्मीदवार की दिव्यांगता योग्यता जानने के लिए मेडिकल बोर्ड बनाया गया है। मगर उम्मीदवार श्रीनगर चला गया। प्राथमिक आधार पर दिव्यांगता योग्य का मामला नहीं दिख रहा है, लेकिन बोर्ड के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
बीओपीईई के कंट्रोलर बोले-संदिग्ध मामलों में कॉलेज को मेडिकल बोर्ड करवाने का हक
बीओपीईई के कंट्रोलर सुनील गुप्ता के अनुसार जीएमसी की ओर से जिन दो एमबीबीएस उम्मीदवारों को दिव्यांगता में अयोग्य करार दिया गया है उनकी फाइल पर काम हो रहा है और अंतिम फैसला जल्द लिया जाएगा। अधिसूचना में बताते हैं कि संबंधित कॉलेज अपने स्तर पर दिव्यांगता आधार वाले संदिग्ध मामलों में मेडिकल बोर्ड करवा सकते हैं। फिलहाल बीओपीईई के पास अभी ऐसी सीधी व्यवस्था नहीं है।