मंगलवार को हुई बैठक पर विवाद : पार्षदों का दावा मीटिंग में पहुंचे, अध्यक्ष बोले-हमने तो बुलाई ही नहीं
उधमपुर। परिषद का हाउस इन दिनों विकास से ज्यादा विवाद के लिए जाना जाने लगा है। अयोग्य घोषित रह चुके पार्षदों ने मंगलवार को हाउस की बैठक बुलाने का दावा कर नई उलझन पैदा कर दी है। उन्होंने दावा किया कि उनके व्हाट्सएप ग्रुप में बैठक को लेकर संदेश आया था। इसलिए वह बैठक के लिए परिषद कार्यालय पहुंचे थे। सीईओ के साथ आधी मीटिंग हुई, इसके बाद सीईओ बीच से उठकर कहीं चले गए। दूसरी ओर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कहना है कि उनके बिना हाउस नहीं बुलाया जा सकता। इसी बीच सीईओ ने इस बैठक को लेकर कुछ भी बताने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मामला अदालत में विचाराधीन है। आखिर हाउस में हुआ क्या? क्या पक रहा है? कौन सी खिचड़ी बन रही है, इसके बारे में किसी के पास न तो पुख्ता सबूत हैं और न संतोषजन जवाब। इस सब के बीच जनता के मुद्दे, विकास की बात दबकर रह जा रही है।
गौरतलब हो कि यह मीटिंग नगर परिषद के चेयरमैन डाॅ. जोगेश्वर गुप्ता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 11 पार्षदों की तरफ से बुलाई गई थी। इसमें नगर परिषद के चेयरमैन डाॅ. जोगेश्वर गुप्ता नहीं थे। पार्षदों ने बताया कि बैठक का उद्देश्य शहर के लंबित विकास कार्याें पर चर्चा करना और शहरवासियों की समस्याओं पर विचार-विमर्श करना था। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप अबरोल मुख्य रूप से शामिल थे, लेकिन बाद में करीब एक घंटे के बाद उन्हें भी डीसी कार्यालय में एक बैठक के सिलसिले में बीच से जाना पड़ा। पार्षदों ने कहा कि अगले सप्ताह फिर से हाउस की बैठक बुलाएंगे, ताकि शहर में लंबित पड़े विकास कार्याें पर चर्चा हो सके।
बैठक में शामिल पार्षद प्रीति खजूरिया, समनीक भसीन, सुनील प्रोच, दर्शन कुमार, आरती वर्मा, जगदीश कुमार, राकेश शर्मा व अन्य ने दावा किया कि करीब डेढ़ महीने के बाद मंगलवार को हाउस की बैठक का आयोजन किया था। इसमें शहर के लंबित मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें विशेष तौर पर फैसला लिया गया है कि ड्रेनेज सेक्टर के तहत प्रत्येक वार्ड में 4.75 लाख रुपए के कार्य करवाए जाएंगे। इसके अलावा जनसंख्या के आधार पर मास्ट लाइट का प्रत्येक वार्ड में वितरण किया जाए और चल रहे विकास कार्यों की गति बढ़ाने पर जोर दिया जाए। पार्षद सुनील प्रोच ने कहा कि अगले सप्ताह फिर से बैठक आयोजित की जाएगी जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा, क्योंकि वर्तमान में शहर के अंदर सीवरेज ब्लाॅकेज के कारण शहरवासियों को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इसके लिए अधिकारियों को कहा जाएगा कि वह स्वयं निगरानी कर समस्या से लोगों को राहत दिलाएं।
सात पार्षदों को दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया है, लेकिन यह पार्षद हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर लेकर पार्षद की तरह काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेशानुसार यह 31 अगस्त तक पार्षद हैं। 31 अगस्त को इनकी स्पेशल ट्रिब्यूनल कोर्ट में सुनवाई है। उन्होंने कहा कि इसी तरह शहर के अन्य कई मुद्दे हैं जिनका निपटारा बिना जनरल हाउस की बैठक में चर्चा किए बिना नहीं हो सकता है। इसलिए वह बार-बार मांग कर रहे हैं कि जनरल हाउस बुलाया जाए। दावा है कि बैठक पूरे नियमों के साथ संपन्न हुई है और इसमें जो भी निर्णय लिए गए हैं, कल दोबारा से उन पर सीईओ के साथ चर्चा कर उन्हें समाधान तक ले जाएंगे।
यह मामला अभी हाईकोर्ट के विचाराधीन है। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
दलीप अबरोल, सीईओ नगर परिषद
बिना चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के हाउस की बैठक बुलाना वैध नहीं है। अगर फिर भी पार्षदों ने जनरल हाउस की मीटिंग बुलाई और वह इसे वैध बता रहे हैं तो हो सकता है यह उनके अनुसार वैध हो।
-डाॅ. जोगेश्वर गुप्ता अध्यक्ष नगर परिषद उधमपुर