दोमाना। नागबनी गांव के नाग देवता मंदिर में बैसाखी के दूसरे दिन 15 अप्रैल को मेला लगाया गया। शाम तक स्टाल और लंगर चले। इसके बाद बिना सफाई के सभी अपना सामान समेटकर चलते बने। अब पूरे परिसर में गंदगी पसरी है। वैसे मंदिर और इसकी जमीन एमएचएसी स्कूल के अधीन है, लेकिन मेले के लिए कोई भी प्रबंध नहीं है। एक दिन के आयोजन में 40 से ज्यादा दुकानें सजी थीं और हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचे।
हालात ऐसे हैं कि जिस धार्मिक स्थल पर आस्था का हुजूम उमड़ा था, वहां कचरे के ढेर लगे हैं। इस कारण लोगों को बीमारियां फैलने का डर सता रहा है। लोगों ने कहा कि मेला महाराजा हरि सिंह ने अपने पुत्र कर्ण सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर लगाना शुरू किया था। तब धूमधाम से मनाया जाता था। मगर अब यह सिर्फ नाम का ही मेला रह गया है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। पलोड़ा के निवासी सूरत भगत बताते हैं - मेला खत्म होने के बाद गंदगी को निपटाना पुजारी के लिए चुनौती से कम नहीं है। करणी सेना भाईचारा कमेटी के अध्यक्ष जोगिंदर संगम ने कहा कि पुण्य कमाने के लिए लंगर वाले हर साल आते हैं, लेकिन गंदगी फैलाकर पाप कमा जाते हैं। डिस्पोजल गिलास व प्लेट जहां-वहां बिखरे हैं, जो हवा से उड़कर तालाब और मंदिर में जा रहे है।
कमेटी का गठन होना जरूरी
नागबनी की सरपंच वंदना कुमारी ने कहा कि जिसे आस्था का तालाब माना जाता है, उसमें गंदगी फैलाने वालों को सोचना चाहिए। लंगर व स्टाल लगाएं, पर कचरा भी उठाना चाहिए। पुरषोत्तम चिब निवासी समैलपुर ने कहा कि प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए। कमेटी गठित कर मेले की देखरेख की जाए। साथ में पहले की तरह आयोजन होना चाहिए। शुभम शर्मा निवासी संग्रामपुर ने कहा कि लंगर और दुकानें लगाने वालों से मामूली शुल्क लेना चाहिए और उस पैसे से सफाई करवाई जानी चाहिए।
कुछ समय पहले ही पदभार संभाला है। इस बारे में इतनी जानकारी नहीं है। जल्द ही समस्या पर संज्ञान लिया जाएगा, ताकि अगली बार ऐसी दिक्कत न आए।
- मनु हंसा, एसडीएम मढ़