नुब्रा घाटी में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को नुब्रा घाटी में सियाचिन नदी पर बनने वाले बर्मा-सुमूर और टोंगस्टेड मोटर योग्य पुलों की आधारशिला रखी। इन दोनों पुलों के निर्माण से सीमावर्ती गांवों की आवाजाही आसान होगी और लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार व सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
बर्मा-सुमूर पुल परियोजना पूरी होने के बाद सुमूर से बर्मा, चारासा, कुरी और मुर्गी गांवों के बीच की करीब 70 किलोमीटर की दूरी घटकर महज 500 मीटर रह जाएगी। इससे स्थानीय लोगों का समय बचेगा और आपात परिस्थितियों में भी तेजी से आवागमन संभव होगा।
64.10 करोड़ की लागत से बनेगा बर्मा-सुमूर पुल
स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज के तहत स्वीकृत इस परियोजना में तीन स्थानों पर कुल 470 मीटर लंबे पुल, 2.5 किलोमीटर लंबी अप्रोच रोड और छह आरसीसी पुलिया का निर्माण होेगा। इससे करीब 848 ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। पुल बनने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
टोंगस्टेड पुल से सात गांवों को राहत
19.29 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले टोंगस्टेड पुल में सियाचिन नदी पर 160 मीटर लंबे स्टील प्लेट गर्डर पुल का निर्माण किया जाएगा। यह पुल टोंगस्टेड, यारमा गोंबो, डोंगसा, नुंगस्टेड, हेनाची, चांगलुंग और सासोमा गांवों को सालभर जोड़ने का काम करेगा। इससे 500 से अधिक लोगों को फायदा मिलेगा।
नुब्रा घाटी के लिए ये परियोजनाएं केवल पुल नहीं, बल्कि विकास और अवसरों की नई राह हैं। हर मौसम में उपयोगी ये पुल बाढ़ और खराब मौसम के दौरान आने वाली परिवहन बाधाओं को दूर करेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि, बागवानी, होमस्टे, हस्तशिल्प, रोजगार और एडवेंचर पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लद्दाख में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास जारी है।
- विनय कुमार सक्सेना, उपराज्यपाल लद्दाख