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जम्मू-कश्मीर: सिंध नदी से झाग और दुर्गंध गायब, प्रदूषण बोर्ड ने लिए नमूने, पानी के रंग बदलने की जांच जारी

Wed, 29 Mar 2023 02:36 AM IST
विमल शर्मा अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

प्रशासन की ओर से गठित कमेटी की ओर से लिए गए नमूनों की प्रस्तावित रिपोर्ट बुधवार शाम तक नहीं मिली है। दरअसल, सोमवार की सुबह से ही कंगन इलाके में सिंध नदी के पानी का रंग दूधिया हो गया था और उसमें झाग दिखाई दे रही थी।
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सिंध नदी गांदरबल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सिंध नदी के पानी से झाग और दुर्गंध गायब हो गई है। इसके साथ ही रंग भी सामान्य हो गया है, जिसके बाद मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के कंगन और आसपास के इलाकों के लोगों ने बुधवार को कुछ राहत की सांस ली है। वहीं, प्रदूषण बोर्ड की एक विशेषा टीम ने बुधवार को स्थिति का जायजा लेकर नमुने लिए हैं।

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इसकी रिपोर्ट तीन दिन बाद आएगी, जिसके बाद ही पानी के रंग बदलने के कारणों का खुलासा हो पाएगा। वहीं, प्रशासन की ओर से गठित कमेटी की ओर से लिए गए नमूनों की प्रस्तावित रिपोर्ट बुधवार शाम तक नहीं मिली है। दरअसल, सोमवार की सुबह से ही कंगन इलाके में सिंध नदी के पानी का रंग दूधिया हो गया था और उसमें झाग दिखाई दे रही थी।

इससे स्थानीय लोग दहशत में थे। लेकिन बुधवार को एक बार फिर से बदलाव देखा गया और पानी फिर सामान्य हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे उन्हें कुछ राहत मिली है। स्थानीय निवासी गुलाम नबी ने बताया कि मंगलवार को पानी का बदला रंग देख कर लोगों दहशत में थे, लेकिन बुधवार को फिर से पानी सामान्य हो गया है।
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लेकिन फिर भी अभी हम एहतियात बरत रहे हैं। अब्दुल मजीद ने कहा कि फिलहाल हम सभी लोग जिला प्रशासन के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं। सिंध के पानी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। पानी का रंग सामान्य होने से कुछ राहत मिली है। लेकिन चाहते हैं कि सही से जांच हो, ताकि आगे अगर पानी का इस्तेमाल हो तो कोई नुकसान न हो।

हमें जांच रिपोर्ट का इंतजार है। गौरतलब रहे कि इस घटना के बाद सोमवार को ही डीसी श्यामबीर सिंह ने एक कमेटी का गठन करते हुए सही से जांच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने लोगों को हिदायत दी थी कि वह वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का ही इस्तेमाल करें।

इस घटना के बाद डीसी ने जल शक्ति विभाग को भी जांच के लिए कहा था। इस दौरान जो एक रिपोर्ट आई है उसमें पानी दूषित पाया गया है। जल शक्ति विभाग की फिजियो केमिकल एंड बैक्टीरियोलॉजिकल वाटर एनालिसिस रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है।

इसमें गंदगी और अवशिष्ट क्लोरीन भी मिला है। पानी पीने के लायक नहीं है। हालांकि, सार्वजनिक उपभोग के लिए इसे फिट और सुरक्षित बनाने के लिए उचित निस्पंदन और क्लोरीनीकरण अनिवार्य है।

मछलियों को नहीं पहुंचा कोई नुकसान : मत्स्य विभाग

जिले में मत्स्य विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर सलमान चालकों ने बताया कि सिंध नदी के पानी का रंग सफेद होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मंगलवार को ही पेट्रोलिंग स्टाफ गगनगीर से नीचे तक सर्वे किया था। इसमें कोई नुकसान नहीं पाया गया। कोई भी मछली मरी हुई नहीं मिली है।

यह सिंध का पानी हमारे कई प्राइवेट और सरकारी मत्स्यपालन यूनिट्स में भी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कोई प्रभाव नहीं दिखाई दिया है। शुरुआती जांच हमने जल शक्ति विभाग के साथ की उसमें पानी में गंदगी (धूल और मिटटी का पानी में मिक्सचर) के कारण रंग बदला हुआ पाया गया और कोई ज़हरीला पदार्थ उसमें नहीं मिला है।

बुधवार को प्रदूषण बोर्ड की एक विशेष टीम मौके पर पहुंच कर सिंध नदी के पानी के नमूने लिए हैं। उन्हें जांच के लिए श्रीनगर लैब ले जाया गया है। बुधवार को पानी में झाग नहीं दिखाई थी और सबकुछ सामान्य था। शुरुआती अनुमान है कि पानी में जो बदलाव आया था वह क्लोरीन के कारण हो सकता है। किसी के पास पुरानी क्लोरीन पड़ी होगी, जिसे पानी में फेंका गया होगा। टेस्टिंग रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर आने की उम्मीद है। - बिलाल खान, जिला अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड, श्रीनगर

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