अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। त्रिकुटा नगर रेलवे रोड स्थित मराठा बस्ती में रविवार की शाम को आग लगने की घटना से घंटों तक अफरा तफरी का माहौल रहा। बस्ती में मौजूद लोग आग से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर भागने नजर आए। आंखों के सामने अपने आशियाने जलने से कईयों की आंखें नम थीं। कईयों का घटनास्थल से दूर रहकर रो-रोकर बुरा हाल था। इस दुखदायी हादसे के कारण 150 लोग बेघर हो गए।
आग लगने के दौरान बस्ती में खासतौर पर अधिकांश पुरुष दिहाड़ी लगाने गए हुए थे, जिससे आग पर तत्काल काबू पाने में सफलता नहीं मिल पाई। बस्ती में रखे कई गैस सिलेंडर फटने के कारण आग इतनी तेजी से फैली की कि किसी को वहां रुकने का मौका नहीं मिला। इस दौरान आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए थे। कई लोग पानी आदि देकर दमकल कर्मियों की मदद कर रहे थे। लेकिन आग के कारण धुआं अधिक फैल जाने से दमकल कर्मियों को भी आगे बढ़ने में मुश्किलें आईं। अपनी आंखों के सामने खुद के आशियाने जलते देखकर कई लोग गमगीन थे।
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दोनों तरफ से पानी फेंका, फिर जाकर बुझी आग
बताते चलें कि जहां आग लगी वहां एक तरफ से दमकल वाहन अंदर तक नहीं जा सके। इस वजह से दूर से ही आग पर काबू पाना पड़ा लेकिन इससे आग काबू में नहीं आ पाई। इसके बाद दमकल वाहनों को रेलवे लाइन की तरफ से घटनास्थल पर पहुंचाया गया। जब दोनों तरफ से पानी फेंका गया तो आग पर काबू पाया गया। आग बुझने तक एक भी झुग्गी नहीं बची और कबाड़ में रखा सामान भी जल गया।
सिर्फ बाहर भागने तक ही समय मिला
बता दें कि झुग्गियां मोम के तिरपाल से बना रखी थीं इसलिए आग लगते ही चंद मिनट में एक के बाद एक चपेट में आ गईं। बस्ती में रहने वाले सलाहुदीन ने बताया कि एक झुग्गी से दूसरी झुग्गी तक आग लगने ने सिर्फ इतना ही समय दिया कि वह बाहर निकल सकें। चंद मिनट में ही सबकुछ जल गया।
आंखों में आंसू लिए निकली महिलाएं
बस्ती में रहने वाली दो महिलाएं जब बाहर निकलीं तो उनका रो-रो कर बुरा हाल था। एक महिला ने बताया कि बड़ी मुश्किल से मेहनत मजदूरी कर सामान बनाया था। चंद मिनट में ही सबकुछ स्वाह हो गया। हालांकि स्थानीय लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया कि शुक्र करें कि उनकी जान बच गई।
पहले भी लग चुकी आग
बताते चलें कि जम्मू के मराठा बस्ती में पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां रहने वाले लोगों ने अपनी झुग्गियों को इस तरह से बना रखा है कि एक चिंगारी सबकुछ जला दे। झुग्गियों के आसपास बिजली की तारों का जाल तक बिछा हुआ है जिनसे अकसर चिंगारियां निकलती हैं।
रिहायशी इलाके में कबाड़खाना नहीं होना चाहिए
स्थानीय लोगों ने कहा कि रिहायशी इलाके में कबाड़खाना होना ही नहीं चाहिए। इसकी कोई अनुमति भी नहीं है। ऐसे कबाड़खाने स्थानीय लोगों के लिए खतरा हैं।