जम्मू। जम्मू-कश्मीर एमेच्योर फेंसिंग एसोसिएशन के चुनाव को लेकर खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लग गया है। जम्मू-कश्मीर खेल परिषद की नजर में जहां चुनाव वैध हैं तो फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से इस पर कड़ा एतराज जताया गया है। परिषद की मदद से राज्य स्तर पर एसोसिएशन खेल गतिविधियां करवा रही है, मगर राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को पहुंचाने के लिए फेडरेशन का साथ जरूरी है। आपसी मतभेद पैदा होने के कारण लग रहा है कि खिलाड़ियों को आगे जाने का मौका शायद ही मिले।
दरअसल, इसी साल छह मई को फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (फाई) ने जम्मू-कश्मीर खेल परिषद को ई-मेल की। इसमें लिखा कि जम्मू-कश्मीर में फेंसिंग एसोसिएशन के चुनाव करवाए जाएं ताकि नवनियुक्त कमेटी खेलों को लेकर योजना बना सके। इसके 8 दिन बाद ही चार साल के लिए जम्मू-कश्मीर एमेच्योर फेंसिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों को चुनाव के माध्यम से चुन लिया गया। मगर, इसमें राष्ट्रीय पर्यवेक्षक को नहीं बुलाया गया। इस कारण चुनाव को फाई ने मान्यता नहीं दी, जिससे खिलाड़ियों के करियर पर प्रश्नचिन्ह लग गया।
इससे पहले 2019 के चुनाव में फाई ने एसोसिएशन से कुछ दस्तावेज मांगे थे, जो नहीं मिले। इसके बाद कोविड के कारण चुनाव नहीं हो पाए। इसी बीच एसोसिएशन के महासचिव का निधन हो गया, जिसके बाद से पद खाली था। 3 जनवरी, 2021 को फाई की प्रदेश में एडहॉक कमेटी बनी जिसे प्रदेश स्तर के खिलाड़ियों को चुनने की जिम्मेदारी मिली। अब चुनाव को लेकर फाई और एसोसिएशन आमने-सामने हो गई है। हालांकि जम्मू-कश्मीर खेल परिषद ने एसोसिएशन को मान्यता दी है।
नेशनल गेम्स में फंस सकता पेंच
अक्टूबर में नेशनल गेम्स के लिए जम्मू-कश्मीर का कौन सी टीम प्रतिनिधित्व करेगी, अब तक यह साफ नहीं है। फेंसिंग के लिए एडहॉक कमेटी के तहत ही खिलाड़ियों को खेलने की मंजूरी मिलेगी। मगर फाई में जेएंडके एमेच्योर फेंसिंग एसोसिएशन मान्य नहीं है। ऐसे में उन खिलाड़ियों की मेहनत खराब हो जाएगी जो एसोसिएशन की ओर से कई साल से तैयारी कर रहे हैं।
चुनाव असंवैधानिक
एडहॉक कमेटी के संयोजक राशिद अहमद चौधरी के अनुसार बिना राष्ट्रीय पर्यवेक्षक के चुनाव कैसे मान्य हो सकता है। उनका कहना है कि चुनाव असंवैधानिक है। कोई भी स्पोर्ट्स बॉडी के चुनाव में राष्ट्रीय पर्यवेक्षक का होना जरूरी है। इसलिए कि बच्चों को नेशनल फेडरेशन के तहत खेलना है। अगर दोनों में तालमेल नहीं है तो टीमों को किसी खेल में जगह नहीं मिल सकती। इससे सीधे तौर पर बच्चों का नुकसान होगा।
ऐसा कुछ जरूरी नहीं है। चुनाव परिषद करवाती है। हम तो अपील कर सकते हैं। परिषद से एसोसिएशन पंजीकृत है। 30 साल से एसोसिएशन चल रही है।
-एमजे शर्मा, संरक्षक, जेएंडके एमेच्योर फेंसिंग एसोसिएशन
रिटर्निंग अफसर ने चुनाव कराए हैं। जम्मू-कश्मीर एमेच्योर फेंसिंग एसोसिएशन काउंसिल से पंजीकृत है। बच्चों और एसोसिएशन को फंड्स दे रहे हैं।
-शेख रियाज़ अहमद, प्रशासनिक अधिकारी, जम्मू-कश्मीर खेल परिषद
चुनाव संवैधानिक रूप से हुए हैं। पहले अधिसूचना निकाली गई थी, जिसमें एडहॉक कमेटी ने आपत्तियां दी। काउंसिल ने उन्हें खारिज कर दिया। संवैधानिक प्रावधान में ऐसा नहीं है कि अगर राष्ट्रीय पर्यवेक्षक न हो तो मान्यता खत्म हो जाएगी। यदि खेल परिषद के पर्यवेक्षक के बिना चुनाव होता है, तो उसे मान्यता नहीं मिलती।
-अंशुजा टाक, रिटर्निंग अफसर
स्पोर्ट्स बॉडी के चुनाव में राष्ट्रीय पर्यवेक्षक जरूरी है। अगर दोनों में तालमेल न हो तो टीमों को किसी खेल में भाग नहीं लेने की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे बच्चों काे नुकसान होगा।
-राशिद अहमद चौधरी, संयोजक, फेंसिंग एडहॉक कमेटी जम्मू-कश्मीर
बिना राष्ट्रीय पर्यवेक्षक के चुनाव मान्य नहीं हैं। हमें कोई रिक्वेस्ट नहीं आई थी।
-राजीव मेहता, महासचिव, फेंसिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया