ज्यौड़ियां के युवक हर्ष नागोत्रा का शव सियालकोट में मिलने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यौड़ियां। ज्यौड़ियां के युवक हर्ष नागोत्रा का पार्थिव शरीर वीरवार को भी ज्यौड़ियां नहीं आया। युवक के परिजन तीन दिन से शव का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि मंगलवार को पाकिस्तान की सेना ने सुचेतगढ़ बॉर्डर से हर्ष नागोत्रा का पार्थिव शरीर भारतीय सेना को सौंपने की बात कही थी, जिसका संदेश देने के लिए सेना ने परिजनों को कहा था।
मगर तीन दिन बीतने के बाद भी शव नहीं पंहुचा। हर्ष के पिता सुभाष चंद्र ने बताया कि हम पिछले तीन दिन से अपने बेटे का शव घर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। हम ने सेना के अधिकारियों से भी आज बात की है, लेकिन कोई भी ठोस जवाब नहीं मिल पा रहा है। सेना के अधिकारियों की तरफ से हमें पिछले तीन दिन से आश्वासन दिया जा रहा है। वीरवार को दिनभर संदेश का इंतजार करते रहे।
ये है मामला
बता दें की ज्यौड़ियां निवासी हर्ष नागोत्रा पुत्र सुभाष चंद्र 11 जून से लापता था, 12 जून को परिजनों ने ज्यौड़ियां पुलिस चौकी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। हर्ष नागोत्रा एयरटेल कंपनी में काम करता था और खौड़ क्षेत्र में तैनात था। 11 जून को वह ड्यूटी पर गया, लेकिन घर वापस नहीं आया। परिजनों ने जब उसकी तलाश की तो उसका मोटरसाइकिल चिनाब दरिया किनारे से मिला। स्थानीय लोगों और पुलिस ने चिनाब किनारे दो-तीन दिन तलाशी अभियान चलाया। 13 जून को हर्ष का शव सियालकोट पाकिस्तान में नहर के बीच से मिला। सियालकोट में शव की पहचान गले में पहने पहचान पत्र से हुई। जिस पर फोन नंबर भी लिखा था। वहां से व्हाट्सएप पर 13 जून से ही मैसेज कर दिया था। जब 12 जुलाई को परिजनों ने डुप्लीकेट सिम कार्ड लेकर फोन में डाला तो सियालकोट से मैसेज मिला। इसमें हर्ष नागोत्रा के आई कार्ड का फोटो और उसके शव का फोटो था। परिजनों ने सियालकोट पाकिस्तान में उस नंबर पर फोन किया तो वहां से परिजनों को पूरी जानकारी मिली की सियालकोट की यह नहर दरिया चिनाब से निकलती है और इस नहर से 13 जून को यह शव मिला है। इसका पोस्टमार्टम करवा कर शव को दफना दिया है। परिजनों ने उसी दिन भारत सरकार से शव को भारत लाने की मांग की। इसके बाद सेना के अधिकारियों ने सोमवार को परिजनों को जानकारी दी कि हर्ष का शव वापस घर लाने के लिए पाकिस्तान रेंजर्स के साथ हाॅटलाइन पर बात चल रही है। मंगलवार को शव घर पर पहुंचना था, लेकिन अब तक नहीं पहुंचा।