संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। जम्मू शहर में शनिवार को मुस्लिम समुदाय ने ईद-उल-फितर मनाया। ईदगाह जामिया मस्जिद समेत शहर की विभिन्न मस्जिदों में निर्धारित समय पर नमाज अदा की। सुबह से ही पूरे समुदाय में खुशी का माहौल था। एक दूसरे के घरों में लोगों का बधाई के लिए तांता लगा रहा। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे को मिठाई भी वितरित की। बच्चे भी मांगने के लिए हंसते किलकारियां भरते नजदीकी मोहल्लों के घरों में पहुंचे। ईद मनाने की खुशी में कई दुकानें बंद रखी गई थी।
महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के सामने से नमाज पढ़कर बाहर निकले एक शख्स शकील अहमद ने बताया कि इस दिन पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने बद्र के युद्द में विजय हासिल की थी। पैगम्बर साहब की जीत की खुशी को व्यक्त करते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उस समय मिठाइयां बांटी थीं। कई किस्मों के पकवान बनाकर खूब जश्न मनाया था। तब से ईद-उल-फितर मनाने की यह प्रक्रिया शुरू हुई। दूसरे व्यक्ति इशफाक ने कहा कि रमजान के महीने की अंतिम रात को चांद देखकर दूसरे दिन मीठी ईद मनाई जाती है। रमजान के 70 दिन पूरे होने के बाद बकरीद का त्योहार भी मनाया जाता है। वहीं, मुस्लिम स्कॉलर इम्तियाज ने कहा कि वह इस्लाम का अच्छा जानकार है। इम्तियाज ने कहा कि यह पर्व पहली बार 624वीं ईस्वी में मनाया गया था।
लोगों की जरूरत को देखकर रखी मास की दुकान खुली
- ज्यूल में फल बेचने वाले गुलाम रसूल ने कहा कि ईद है। लेकिन अपना काम नहीं छोड़ सकता। आज से पहले जो कमाया था। वह ईद पर्व पर खर्च कर दिया है। अगर आज दिहाड़ी नहीं लगेगी तो कल बच्चों को क्या खिलाएंगे। मन तो करता है परिवार के साथ रहने का। लेकिन उनका खर्चा भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अल्ला की रहमत से अभी तक पंद्रह सौ दिहाड़ी बन चुकी है। दो घंटे के बाद घर चले जाएंगे। एक मास बेचने वाले मुश्ताक ने कहा कि लोगों की जरूरत होती है। तभी दुकान खुली रख दी है। गर्मी का मौसम है। लोग पहले तो खरीद कर नहीं रख पाते हैं।