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शिक्षा को पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से संचालित किया जाना चाहिए : एलजी

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-उप राज्यपाल ने ''शैक्षणिक प्रशासकों के नेतृत्व विकास'' पर तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया
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-कहा, प्रदेश हमारे छात्रों को सर्वोत्तम पाठ्यक्रम देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का जम्मू-कश्मीर में उचित और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन हो, इसके लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। प्रदेश में एनईपी के कार्यान्वयन में कई शैक्षणिक संस्थानों ने बेहतर काम किया है, लेकिन इसमें समग्र भागीदारी जरूरी है। इसके साथ ही शिक्षा को पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से संचालित किया जाना चाहिए। एनईपी के उचित कार्यान्वयन में अगर हम चूक गए तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा। विश्वविद्यालय में पुरानी छवि को नहीं बदला गया तो भविष्य का निर्माण नहीं हो पाएगा। विज्ञान और संस्कार का मिला जुला स्वरूप ही भारत के टेलैंट को अलग बना सकता है। ये बातें उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय में एनईपी के कार्यान्वयन व उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में कही।
जम्मू-कश्मीर के कॉलेजों के अकादमिक प्रशासकों और प्राचार्यों का नेतृत्व विकास पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन जम्मू विश्वविद्यालय और एनआईईपीए के सहयोग से किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उप राज्यपाल ने कहा कि अमेरिकी शिक्षा सुधारक जॉन डिवी ने कहा था कि शिक्षा जीवन के लिए तैयारी नहीं है, शिक्षा ही जीवन है। समय के अनुकूल और समाज की जरूरत के अनुरूप शिक्षा होनी चाहिए। जो हमने आज पढ़ाया है और जो कल पढ़ाएंगे, उसमें कितना मूल्य संवर्धन किया है, इसका आकलन करना होगा। शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों में रचनात्मक, अभिनव होने की क्षमता विकसित करनी होगी। छात्रों को सर्वोत्तम पाठ्यक्रम देने, दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए उन्हें ज्ञान और कौशल देने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा में सुधार जरूरी है। विश्वविद्यालयों को बौद्धिक संपदा बनाने पर ध्यान देना होगा। शैक्षणिक संस्थानों को छात्रों की रचनात्मक, नवीनता विकसित करने व सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने पर काम करना होगा। कक्षाएं कल्पना को सक्षम करने वाली होनी चाहिए। 21वीं सदी में शिक्षण संस्थानों का मुख्य फोकस सलाह देना होना चाहिए। शिक्षा पाठ्यक्रम के बजाय रचनात्मकता से प्रेरित होनी चाहिए, जो युवाओं की रचनात्मक होने की क्षमता विकसित करे। विज्ञान और संस्कार का मिला जुला स्वरूप ही भारत के टेलैंट को अलग बना सकता है।
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एलजी ने कहा, उच्च शिक्षा में महिलाओं, अनुसूचित जाति व जनजाति की भागीदारी बढ़ी है। ज्ञान अर्थव्यवस्था का निर्माण करना सरकारी काम नहीं है। इसमें शैक्षणिक संस्थाएं, शिक्षक, विद्यार्थी सबको मिलर कार कार विनिर्माण इकाई की तरह काम करना होगा। उप राज्यपाल ने लिटिजन ट्रांसलेशन संवाद और अकादमिक जरनल परिप्रेक्ष्य नामक पत्रिका सहित कई प्रकाशन जारी किए। इसके बाद जम्मू यूनिवर्सिटी के वीसी ने प्रदेश में एनईपी के कार्यान्वयन चुनौतियां और भविष्य की रणनीति पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी। कार्यक्रम में जम्मू विवि के वीसी प्रो. उमेश राय, सलाहकार आरआर भटनागर, उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. दिनेश सिंह, पूर्व राजदूत यश वर्धन सिन्हा, अशोक कुमार कांत सहित अन्य शिक्षाविद् शामिल रहे।
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