रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अनुबंधित स्टाफ की सेवाएं समाप्त कर देने के बाद शहर के कई अस्पतालों में काम प्रभावित हुआ। कई एसोसिएटेड अस्पतालों में काम चलाऊ ओपीडी की गई। एमसीएच (जच्चा-बच्चा) गांधीनगर अस्पताल में ओपीडी में डाॅक्टरों के सहयोग के लिए निजी सुरक्षाकर्मियों और एनओ (नर्सिंग अर्दली) को लगाया गया। जबकि वहां पैरा मेडिकल स्टाफ को लगाया जाना चाहिए था।
अस्पताल में सर्जरी, लेबर रूम और प्री पोस्ट ऑपरेटिव व्यवस्था बंद कर दी गई है। राज्य कैंसर संस्थान जम्मू में कैंसर पीड़ित मरीजों के लिए डे केयर कीमोथैरेपी चलाने के लिए पैरा मेडिकल छात्रों की सेवाएं ली गईं। जीएमसी में वार्डों से हटाकर चिकित्सा स्टाफ को इमरजेंसी में लगाया गया।
इससे लगभग हर जगह स्टाफ की किल्लत बनी हुई है। इन अस्पतालों में बिना प्रशिक्षित स्टाफ की सेवाएं लेने से रोगी चिकित्सा देखभाल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठता है। एमसीएच गांधीनगर अस्पताल गायनी की ओपीडी में प्रशिक्षित पैरा मेडिकल स्टाफ का अभाव बना हुआ है।
पहले ऐसे स्टाफ की मरीज की ब्लड प्रेशर जांच, स्टेरलाइजेशन सहित अन्य जांच में मदद ली जाती है। लेकिन अब यह निजी सुरक्षाकर्मियों और एनओ के बस की बात नहीं है। उन्हें सिर्फ डाॅक्टरों का सहयोग करने के लिए रखा गया है। प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में अस्पताल के दूसरे फ्लोर पर सर्जरी, लेबर रूम, प्री पोस्ट ऑपरेटिव व्यवस्था को बंद कर दिया गया है।
यहां पहले रोजाना 2-3 से सिजेरियन किए जाते थे। इसमें मासिक 35-40 सिजेरियन में 10-15 सामान्य होते थे। अस्पताल के चौथे फ्लोर पर निक्कू-पिक्कू वार्ड को किसी तरह से चलाने के लिए थियेटर के 5-6 चिकित्सा स्टाफ को उठाकर वहां लगाया गया है।
पहले वार्ड में 100 बच्चे भर्ती रहते थे, लेकिन अब स्टाफ के अभाव में 40 ही रह गए हैं। अस्पताल के तीसरे फ्लोर पर दो कोविड मरीज भी भर्ती हैं। वहीं, राज्य कैंसर संस्थान जम्मू में डाक्टरों ने किसी तरह से ओपीडी चलाई।
वार्ड में डे केयर कीमोथैरेपी के लिए डाॅक्टरों की देखरेख में पैरा मेडिकल छात्रों की सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव बना हुआ है। अस्पताल में खून चढ़ाने के लिए आए कई मरीजों को मंगलवार को जीएमसी शिफ्ट कर दिया गया।
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में डीआरडीओ का करीब 150 चिकित्सा स्टाफ निकाला गया है। आगामी दिनों में भी एसोसिएटेड अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ का संकट बना रहेगा।
एमसीएच में फार्मेसी भी एनओ के हवाले
किसी भी अस्पताल में फार्मेसी चलाने के लिए फार्मासिस्ट अनिवार्य होता है। लेकिन एमसीएच गांधीनगर में डीआरडीओ के फार्मासिस्टों के चले जाने से अब फार्मेसी के काउंटर पर स्टोर कीपर की देखरेख में एक एनओ को बिठा दिया गया है, जो पूछकर मरीजों को दवाएं दे रहा है।
स्टाफ की उपलब्धता के लिए उचित प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण यूनिटों में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता को सुनिश्चित बनाया जा रहा है। - डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल, जीएमसी जम्मू