संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। शहर की वार्ड-65 में लगाई गईं स्ट्रीट लाइटें खंभों पर शोपीस बनकर रह गई हैं। तीन माह से बंद पड़ी लाइटों से शाम ढलते ही सड़कें-गलियां अंधेरे के आगोश में समा जाती हैं। रात को आवागमन मुश्किल हो रहा है। जरूरी काम पड़ने पर लोगों को टॉर्च या मोबाइल की लाइट जलाकर घर से निकलना पड़ता है। वार्डवासियों का आरोप है कि कई बार समस्या हल करने की गुहार लगाई गई, लेकिन नगर निगम की नींद नहीं खुल रही है। गजयसिंह पुरा के निवासी विशन सिंह, पटोली के धीरज शर्मा आदि ने बताया कि तीन माह से स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। इस समस्या के बारे में नगर निगम को कई बार ऑनलाइन शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई भी अधिकारी या कर्मचारी लाइटों को ठीक करने नहीं पहुंचा।
पार्षद अनिता शर्मा ने बताया कि वार्ड में तीन साल पहले 12 सौ स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थीं। इनमें से 400 बंद पड़ी हैं। छह महीने पहले वार्ड में नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए टीम आई थी, जो 200 के करीब लाइटें लगाकर गई, लेकिन इनमें से आधी को अभी तक कनेक्शन नहीं दिया गया। लाइटें खंभों पर शोपीस की तरह लटकी हुई हैं। आरोप लगाया कि नगर निगम में पार्षदों की भी बात नहीं सुनी जा रही।
परेशानी लोगों की जुबानी
गजयसिंह पुरा के निवासी विभीषण वर्मा ने बताया कि उनके घर के बाहर लगी स्ट्रीट लाइट तीन महीने से खराब है। रात को अंधेरे में घर से बाहर जाने में डर लगता है। नागबनी के रिक्की चिब ने कहा कि उनकी गली की सभी स्ट्रीट लाइटें रात को जलती नहीं। कुछ खुद पैसे देकर ठीक करवाईं तो कई अभी भी बंद हैं। जसबीर चिब ने कहा कि न ही नगर निगम का एप काम करता है और न ही टोल फ्री नंबर लगता है। अब अपनी समस्या किसको बताएं। समझ नहीं आता कि नगर निगम ऐसे ठेकेदारों को काम क्यों देता है, जो काम नहीं कर पाते।
स्ट्रीट लाइटें खराब होने की जानकारी नहीं थी। इसके बारे में संबंधित अधिकारियों को बताकर लोगों की समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा।
- अरुण गुप्ता, एक्सईएन, नगर निगम