डोडा के अस्सर में हुए बस हादसे में मारे गए लोगों को वीरवार को अंतिम विदाई दी गई। हादसे में घायल 16 लोगों का डोडा और जम्मू जीएमसी में इलाज चल रहा है। कुछ के आपरेशन किए गए हैं। घायलों में से कुछ की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। उधर, किश्तवाड़ के सभी 12 मृतकों का भी संस्कार कर दिया गया है। वीरवार को हर किसी की जुबां पर एक दिन पहले हुए हादसे का जिक्र था और शोक संतप्त परिवारों के साथ संवेदना।
हादसे के बाद जम्मू-कश्मीर संभाग में पुलिस और परिवहन विभाग अचानक से सरगर्म हो गया है। पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग ने नाके लगाकर ओवरलोड वाहनों को जांचा और चालान काट मोटा जुर्माना वसूल किया। इसके साथ ही फिटनेस नहीं होने पर दर्जनों वाहनों को जब्त भी किया गया। उधमपुर में दोमेल चौक, राष्ट्रीय राजमार्ग, एमएच चौक, सलाथिया चौक और रेहम्बल मेटोडोर स्टैंड पर कार्रवाई की गई।
इस बीच एआरटीओ रोमेश कुमार के नेतृत्व में मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट ने मेटाडोर स्टैंड पर नाका लगाकर वाहनों के दस्तावेज चेक किए और 11 वाहन को सीज किया। पुलिस ने किश्तवाड़ में भी जगह-जगह नाकाबंदी कर चालान काटे और ओवरलोड वाहन जब्त किए। इसके अलावा कटड़ा, चिनैनी और रामबन में भी ओवरलोड वाहनों के खिलाफ अभियान चला। कटड़ा में 37 वाहनों के चालान काट 25 हजार रुपए जुर्माना भी वसूला किया गया।
हादसे के दूसरे दिन भी किश्तवाड़ में सारा दिन शोक की लहर रही। बस दुर्घटना में मारे गए छत्तीसगढ़ के तीनों लोगों का स्थानीय लोगों ने सुबह चौगान मैदान श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया। इसके बाद इसी श्मशानघाट में शहर के मां और बेटे का एक ही चिता पर संस्कार किया गया। इस परिवार का एक सदस्य परीक्षम अभी घायल है और उसका डोडा जीमएमसी में इलाज चल रहा है। मृतका आशू परिहार की बहन रेनुका जिसकी इस हादसे में जान चली गई, का अंतिम संस्कार सरूड़ कुकड़वास में किया गया। संस्कार के समय दोनों बेटियों की मां का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने पहले एक बेटी और दोहते का संस्कार किया फिर दूसरी बेटी के संस्कार में शामिल हुई।
जानकारी के अनुसार, आशू परिहार और उसके बेटे सक्षम परिहार की हादसे में मौत हो गई थी और दूसरा बेटा परीक्षम जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। पत्नी और बेटे को मुखाग्नि देते समय पति अजय परिहार का बुरा हाल था। वह कमर को पकड़कर फफक-फफककर रो रहा था। बस इतना ही कह रहा था कि मैंने कभी इनको बस में नहीं भेजा। पहली बार बस से भेजा था, पता होता तो हमेशा की तरह टैक्सी से ही भेजता। फौजी रिटायर पिता ने दोनों बच्चों का जम्मू में पढ़ाई के लिए दाखिला करवा रखा था। इन दिनों दोनों बच्चे मां के साथ दिवाली पर घर आए थे। छु्ट्टियां खत्म होने पर जम्मू लौट रहे थे कि हमेशा के लिए चले गए। अजय ने बताया कि उसने खुद बस स्टैंड जाकर तीनों को खुशी-खुशी जम्मू के लिए रवाना किया था। साली भी उनके साथ जम्मू जा रही थी।संस्कार के समय अजय के दुख में इलाके के सैकड़ों लोग शामिल हुए और उन्हें ढांढस बंधाया।
अभी भी खौफ के उस पल से बाहर नहीं निकल पा रहे
डोडा बस हादसे के जिन गंभीर घायलों का जम्मू के जीएमसी में इलाज चल रहा है, ये यात्री अभी भी खौफ के उस पल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सौरभ कुमार (21) निवासी डुल किश्तवाड़ ने बताया कि वह बस में चालक की सीट के बिल्कुल पीछे एक नंबर केबिन में बैठे थे। किश्तवाड़ से उधमपुर में अपने दोस्त से मिलने आ रहे थे। किश्तवाड़ बस स्टैंड से बस खाली थी। डोडा और खिलैनी में कई सवारियां बिठाई गईं, जिसमें कई यात्री बस में खड़े थे। अचानक चालक स्टेयरिंग घुमाने लगा। ऐसा लगा उसके नियंत्रण से बस निकल गई हो और तभी जोरदार आवाज के साथ बस करीब 300 फुट नीचे पुरानी सड़क पर जा गिरी। अस्पताल में पांच घायलों को उपचार दिया जा रहा है। जिसमें तीन आईसीयू, एक इमरजेंसी तीन (रिकवरी) और एक इमरजेंसी रूम नंबर 7 में उपचाराधीन है।
इमरजेंसी वार्ड 3 (रिकवरी) वार्ड के बेड 87 पर भर्ती घायल सौरभ की टांगों, गले, कंधों, आंखों, माथे सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें हैं। माथे पर कई टांके भी लगाए गए हैं। सौरभ ने बताया कि किश्तवाड़ से जब बस चली तो सब ठीक था। सवारियां भरने के साथ बस ओवरलोड हो गई। अचानक उसे टायरों के घसीटने की आवाज आई। आगे देखा तो चालक स्टेयरिंग को संभालने की कोशिश कर रहा था लेकिन बस खाई में चली गई और उसके बाद आंखों के आगे अंधेरा छा गया। चारों ओर चीख पुकार थी। बस में उसे अपना एक दोस्त मिला था, जिसकी शायद मौत हो गई है। एक अन्य घायल रेखा देवी (35) निवासी बरशाला ठाठरी डोडा ने बताया कि जब हादसा हुआ तब वह नींद में थी। उनका परिवार कुंजवानी में एक फैक्टरी में काम करता है और वह अकेली जम्मू आ रही थीं। रेखा की कमर, पेट, टांग, गर्दन सहित शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। अन्य घायलों में रोशनी देवी (70) निवासी किश्तवाड़, सुजाल (18) निवासी अस्सर डोडा और आरुहि (8) को मुख्य और इमरजेंसी आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इसमें कइयों के आपरेशन किए गए हैं, जिनमें उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। जीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नरेंद्र बुतियाल के अनुसार घायलों को उचित उपचार दिया जा रहा है।