कृषि अधिकारी ने दी दवाओं का छिड़काव करने की सलाह, कारण भी बताए
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। क्षेत्र के कुछ गांवों में इस समय धान की फसल पर ब्लास्ट बीमारी का खतरा बढ़ गया है। पौधे पर आंख की शक्ल के भूरे रंग के धब्बे बन रहे हैं, जो धीरे-धीरे पूरे पौधे को अपनी चपेट में ले लेते हैं। इसके बाद पौधा नष्ट हो जाता है। इससे फसल की पैदावार में बड़े पैमाने पर असर पड़ता है। इस बीमारी के फैलने का मुख्य कारण किसानों द्वारा फसल बोने से पहले बीज का उपचार न करना, तापमान में उतार-चढ़ाव और खेतों से पानी की निकासी न होना है।
पिंडी चाढ़का गांव के सुरेश कुमार ने कृषि विभाग के अधिकारियों को पौधे के सैंपल लेकर दिखाया और कहा कि पौधे भूरे रंग के पड़ रहे हैं। उसके बाद कृषि अधिकारी महेश शर्मा और गुरमीत सिंह ने खेतों का दौरा किया और पाया कि उस पर ब्लास्ट बीमारी ने अटैक कर दिया है। उन्होंने खेतों में तकरीबन चार कैनाल बासमती 370 की फसल को प्रभावित पाया। इसके अलावा क्षेत्र के गांव चक माजरा से भी ब्लास्ट के मामले सामने आ रहे हैं। कृषि अधिकारियों ने खेतों का दौरा कर किसानों को हेक्सागोनजोले और वैलिडमायसिन प्रति कनाल पर्याप्त मात्रा के अनुसार दवाई मिलाकर स्प्रे करने के लिए कहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। धान को दवाइयां छिड़क कर बचाया जा सकता है।
क्षेत्र में धान की फसल 15 दिनों तक निखरना शुरू हो जाएगी। किसानों के अनुसार इस बार धान की फसल खेतों में बेहतर दिखाई दे रही है। परंतु, ब्लास्ट बीमारी के खतरे ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की फसल का यह समय दाने निकलने का होता है। लेकिन, इस समय अगर बीमारी फसल को चपेट में लेती है तो धान की फसल की पैदावार पर बड़े पैमाने पर असर होगा।