जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 21 अप्रैल को पुंछ के भाटादूड़ियां इलाके में हुआ हमला स्थानीय समर्थन से अंजाम दिया गया। इस हमले में आतंकवादियों ने स्टील की परत वाले कवच-भेदी गोलियों का इस्तेमाल किया था।
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्राकृतिक ठिकानों का पता लगाने के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। शुरुआती जांच से पता चलता है कि राजौरी-पुंछ इलाके में नौ से 10 विदेशी आतंकवादी सक्रिय हो सकते हैं, जिन्होंने हाल ही में घुसपैठ की हो सकती है।
आगे उन्होंने कहा कि निसार और उसके परिवार ने आतंकियों को मदद की है। उन्होंने दो महीने तक आतंकियों को घर में रखा। उन्हें हर प्रकार से सहायता की। आतंकियों के लिए सीमा पार से ड्रोन से हथियार, ग्रनेड, पैसा आया, जिसे उन्होंने ही आतंकियों तक पहुंचाया।
निसार और उसके परिवार के खुलासों से मामले की जांच करने के लिए दिशा मिली है, लेकिन सही सफलता आतंकियों का पता लगा कर उन्हें वफिल करने पर ही मिलेगी, जिसके लिए प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा कि भाटादूडियां में आतंकियों द्वारा प्रयोग किए गए हथियार कश्मीर घाटी में प्रयोग होते रहे हैं। इनका प्रयोग इस लिए किया जाता है कि कहीं छोटी-मोटी मोर्चा बंदी हो तो उसे भी भेदा जा सके।