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Jammu News: बीमारी, दुर्घटना, बुढ़ापा है तो बस बहाना<bha>;</bha> मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है जन्म लेना

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आरएस पुरा में सप्त दिवसीय हनुमत यज्ञ में पहुंचे स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं को किया निहाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरबनी/आरएस पुरा। आरएस पुरा से सटे क्षेत्र पटरी के एसबी फार्म में श्री हनुमान युवा संगठन समिति ने सप्त दिवसीय हनुमत यज्ञ का आयोजन किया। इसमें 11 कुंडीय हवन, नित्य सत्संग एवं विश्व कल्याण के लिए सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ लगातार जारी है। रविवार को महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज विशेष भक्ति के स्वरूप का विवेचन एवं सत्संग करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि बीमारी, दुर्घटना, आदि तो बहाना है। मृत्यु का सबसे बड़ा कारण जन्म लेना है। सत्कर्म कर मोक्ष प्राप्त करें, जिससे जन्म ही न हो।
प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि शरीर हर पल मर रहा है। क्यों न उसकी पहचान करें, जो कभी नहीं मरता। उसे आत्मानुभूति, आत्मानंद, आत्मस्वरुप, आत्मशक्ति, आत्मशांति के नाम से जाना जाता है। भगवान की सच्ची भक्ति ही मुक्ति का साधन है। क्षणिक सुख दुख मिला हुआ सुख है। बिना दुख वाला सुख तो परमात्मा ही दे सकता है। क्योंकि परमात्मा अविनाशी, नित्य, शाश्वत, सत्य, सुख स्वरूप है। प्रभु से जो मिलता है, उसके सुख का कभी नाश नहीं होता है। संसार की वस्तु, व्यक्ति, पदार्थ नाशवान है। शरीर के साथ आत्मा का ध्यान महत्वपूर्ण बात है। पृथ्वी पर सत्संग की प्राप्ति स्वर्ग से बढ़कर है।
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उन्होंने कहा कि परमात्मा के बनाए संपूर्ण जगत में प्रत्येक जीवात्मा सुख-शांति प्राप्त करना चाहती है। श्रीमद्भागवत के आचार्य श्री सतगुरु शुकदेव मुनि महाराज ने राजा परीक्षित को समझाया कि परम पिता परमात्मा पूर्ण ब्रह्म परमेश्वर के प्रति अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से एकाग्र चित्त होकर नित्य ध्यान, साधना, नाम स्मरण करना चाहिए। प्रत्येक मनुष्य मात्र हमेशा दिनभर और जीवन भर शांत, प्रसन्न, संतुष्ट रहना चाहता है। मृत्यु याद दिलाती है, अमृत की खोज करो, जिसकी कभी मृत्यु नहीं होती है, उस अमर, नित्य, शाश्वत आत्मा को जानने का प्रयास करो। मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बीमारी, दुर्घटना, बुढ़ापा नहीं बल्कि जन्म होना है। जन्म न हो तो मृत्यु नहीं होगी। ऐसा सत्कर्म करें जिससे जन्म ही न हो।
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