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जम्मू कश्मीर: दुनिया की जुबान तक पहुंचेगा पारंपरिक जायका, डोडा की गुच्छी-भद्रवाह के राजमा को मिलेगा जीआई टैग

Sun, 11 Dec 2022 08:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

जीआई टैग होने पर यह उत्पाद अपनी विशेष पहचान के साथ देश-दुनिया तक पहुंच सकेंगे। जम्मू विश्वविद्यालय में गोल मेज बैठक में व्यंजनों के अलावा राजोरी में थन्नामंडी की चिकरी लकड़ी की दस्तकारी और भद्रवाह के पश्मीना को भी जीआई टैग के लिए प्रस्तावित किया गया है।
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राजमा - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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जम्मू संभाग के पारंपरिक जायकेदार व्यंजनों की जीआई टैगिंग होगी। डोडा की गुच्छी, भद्रवाह के राजमा, रामबन का सुलेई शहद व अनारदाना, उधमपुर की मशहूर कलाड़ी की ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैगिंग के लिए आवेदन जमा कराए गए हैं।

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जीआई टैग होने पर यह उत्पाद अपनी अलग विशेष पहचान के साथ देश-दुनिया तक पहुंच सकेंगे। जम्मू विश्वविद्यालय में गोल मेज बैठक में व्यंजनों के अलावा राजोरी में थन्नामंडी की चिकरी लकड़ी की दस्तकारी और भद्रवाह के पशमीना को भी जीआई टैग के लिए प्रस्तावित किया गया है।

पारंपरिक रूप से तैयार होने वाली कुल आठ स्थानीय वस्तुओं को अब जीआई टैगिंग प्रक्रिया के लिए जांचा जाएगा।उद्योग प्रसार एवं आंतरिक व्यापार विभाग में पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेडमार्क महा नियंत्रक प्रो. उन्नत पंडित ने बताया कि जीआई टैगिंग के लिए जम्मू संभाग के आठ उत्पादों के आवेदन मिले हैं।
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इन आवेदनों की समीक्षा की जाएगी। संबंधित उत्पादकों और किसानों से मुलाकात की गई है। अब इन उत्पादों से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाकर जीआई टैगिंग की कसौटी पर कसा जाएगा। प्रो. उन्नत ने कहा, गोल मेज बैठक का आयोजन विश्वविद्यालय को जीआई टैगिंग प्रक्रिया से जोड़ने के मकसद से भी किया गया।

इन प्रयासों से उद्यमशील माहौल को और विस्तार दिया जा सकता है। प्रो. उन्नत ने कहा, विश्वविद्यालय की फैकल्टी को प्रशिक्षण देकर उद्यम अनुकूल ईको सिस्टम तैयार में समक्ष बनाया जा सकता है।

सुलेई शहद दुनिया में सबसे बेहतर

रामबन से पहुंचे राहुल राठौर ने कहा, सुलेई शहद दुनिया में सबसे बेहतर है। मधुमक्खी सुलेई यानी वन तुलसी के पराग कणों से यह दुर्लभ शहद तैयार करती है। इससे शहर के औषधीय गुण कई गुना बढ़ जाते हैं। वहीं सहायक हस्तशिल्प अधिकारी अमित खजूरिया ने कहा, राजोरी के थन्नामंडी की चिकरी लकड़ी की कारीगरी बेहद खास है। जीआई टैग मिलने से इस कला को और प्रोत्साहन मिलेगा।

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