विजयपुर। विश्वकर्मा मंदिर के पास चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंकज शास्त्री वृंदावन वाले ने अपने प्रवचनों में अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र सुदामा से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे। द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगा लिया। संवाद