सेवारत कर्मचारी की मौत पर आश्रित को अनुकंपा आधारित नौकरी और आर्थिक सहायता देने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक परिषद ने पुनर्वास नीति को मंजूरी दे दी है।
योजना के प्रस्तावित लाभार्थियों को पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। पुनर्वास योजना के तहत नौकरियों के लिए पद और योग्य उम्मीदवारों की सूची हर साल मेरिट आधार पर निकाली जाएगी। हर तीन माह बाद इस सूची को अपडेट किया जाएगा। पदों और आवेदकों का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे। इससे पूर्व में इस तरह के मामलों को एसआरओ-43 के तहत लाभ दिया जा रहा था।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में प्रशासनिक परिषद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्वास सहायता योजना 2022 को स्वीकृति दे दी। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस योजना में अनुकंपा आधारित नौकरी और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को पहले से अधिक पारदर्शी और सबसे जरूरतमंद आवेदक तक लाभ पहुंचाने के मकसद से लाया गया है। योजना में अब तक के अनुभवों और अलग-अलग तरह के मामलों का अध्ययन कर तैयार किया गया है। नई योजना के तहत सरकारी कर्मचारी की मौत होने पर उसके आश्रितों को मदद मिलेगी। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग के पास वर्ष 1994 में जारी एसआरओ-43 के तहत लंबित मामलों की नियुक्तियां पुराने नियमों से होंगी।
इन मामलों में आश्रितों को मिलेगा योजना का लाभ
सरकारी कर्मचारी की सेवारत रहते सामान्य मौत, आतंकवाद रोधी अभियान में शहादत, नियंत्रण रेखा व अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दुश्मन की गोलाबारी से मौत होने, पेंशन की अयोग्यता के साथ सेवानिवृत्त होने पर पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा। योजना में शर्त ये होगी कि कर्मचारी आतंकवाद संबंधी गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए। इन सब मामलों में सरकार सबसे जरूरतमंद मामलों को देखेगी।
निचले पदों पर होगी नियुक्ति
अनुकंपा आधारित नियुक्ति मल्टी टास्किंग स्टाफ या समक्ष अथवा अराजपत्रित कैडर की सबसे निचले पदों पर की जाएगी। यदि आवेदक स्नातक या फिर उच्च शिक्षित है तो अराजपत्रित श्रेणी के पदों पर नियुक्ति की अनुशंसा का प्रावधान भी होगा।