अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। डेंगू के हमले बढ़ने के साथ प्लेटलेट की मांग दोगुनी हो गई है। सरकारी व निजी अस्पतालों में रोजाना औसतन 80 से 90 पीड़ितों को प्लेटलेट चढ़ाई जा रही हैं। स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए जीएमसी के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट बढ़ाई है। इसके बावजूद प्लेटलेट को लेकर तीमारदारों और मरीजों में जद्दोजहद बढ़ी है। प्रदेश में रोजाना 70 से 90 के बीच नए मामले मिले रहे हैं, जिसमें 70 से 80 प्रतिशत तक मामले जम्मू जिले से ही हैं।
निजी अस्पतालों में एस्काम व बीएन में प्लेटलेट का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में रोजाना 50 से 60 यूनिट प्लेटलेट की आपूर्ति हो रही है। जीएमसी से कुछ यूनिट गांधीनगर अस्पताल भेजे जा रहे हैं, जबकि वहां लैब में भी प्लेटलेट तैयार की जा रही हैं। प्रतिदिन 4 से 5 डेंगू मरीजों को प्लेटलेट चढ़ाई जा रही हैं। 40 के करीब डेंगू लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसिन वार्ड को लगभग डेंगू वार्ड बना दिया है। सरवाल अस्पताल में जीएमसी या एसएमजीएस से 2 से 3 यूनिट प्लेटलेट की आपूर्ति की जा रही है।
एस्काम (बत्रा) अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रवींद्र रतन पाल के अनुसार रोजाना 3 से 5 पीड़ितों को प्लेटलेट चढ़ाई जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर और नवंबर में भी डेंगू का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे प्लेटलेट की मांग बढ़ेगी। जीएमसी के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि प्लेटलेट की मांग को पूरा करने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट को बढ़ाया गया है। कार्यालय समय सुबह 10 से 4 बजे के बाद रात 8 बजे तक अतिरिक्त शिफ्ट शुरू की गई है।
होल ब्लड और एसडीपी से लिए जा रहे प्लेटलेट
कंपोनेंट लैब के अस्पतालों में होल ब्लड और एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट) से मांग पूरी की जा रही है। होल ब्लड में एक रक्त यूनिट से 50-70 एमएल का रेंडम डोनर प्लेटलेट बनता है और 5000 तक प्लेटलेट होते हैं जबकि एसडीपी में पीड़ित के ब्लड ग्रुप वाले डोनर से अत्याधुनिक मशीन ए फैरेसिस से प्लेटलेट लिए जाते हैं। प्लेटलेट निकालकर वापस खून शरीर में डाल दिया जाता है और एक प्लेटलेट यूनिट में लगभग 30,000 यूनिट बनते हैं। मानव शरीर में दस दिन तक प्लेटलेट का जीवन होता है, जबकि इन्हें बाहर पांच दिन ही रखा जा सकता है। सामान्य तौर पर डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख तक प्लेटलेट होते हैं। चिकित्सकों के अनुसार दस हजार से कम प्लेटलेट पर खतरा रहता है।