अमर उजाला ब्यूरो जम्मू। एआईबीसीएफ ने उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू से अपील की है कि वह कुछ जायज मांगों पर ध्यान केंद्रीत करें।उन्होंने कहा कि पुनर्गठन अधिनियम 2019 को अपनाकर, जम्मू और कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों यानी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया। दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में, जम्मू और कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य के आरक्षण अधिनियम 2004 को आगे बढ़ाया गया।. उन्होंने कहा कि आरक्षण का अधिनियम पूरी तरह सही नहीं था क्योंकि इसमें विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण कोटा नहीं रखा था। जिसपर जम्मू और कश्मीर के अन्य पिछड़े हुए वर्गों और लद्दाख के शिड्यूल ट्राइव लोगों द्वारा लगातार आवाज उठाई गई।उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश में सरकार ने एसईबीसीसी कमीशन बनाई थी जो ओबीसी आरक्षण संबंधित मुद्दों पर काम करेगी, पर अभी तक उनके द्वारा कुछ नहीं किया गया है आदि और भी कई तथ्य प्रस्तुत किए गए। उन्होंने उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू से अपील की है कि वह लद्दाख का मॉडल अपनाकर ओबीसी समुदाय को 27 प्रतिशत आरक्षण दें। इससे यह निश्चित हो जाएगा कि एक देश, एक संविधान और सभी वर्गों के साथ एक जैसा व्यवहार।