जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के शोधार्थियों ने स्टेट काउंसिल एजूकेशन एंड रिसर्च ट्रेनिंग (एससीईआरटी) की जारी अधिसूचना में अनुभव की शर्त को हटाने की मांग उठाई है। इसके तहत गत वर्ष असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर अकेडमिक अफसर, अकेडमिक अफसर, शिक्षा प्रौद्योगिकी अधिकारी व लिपि लेखक के पद सृजित किए गए थे।
जम्मू विश्वविद्यालय के शोधार्थी रवेल परिहार ने बताया कि 2021 में सरकार ने एससीईआरटी में रिक्त पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की थी। इसमें इच्छुक अभ्यर्थियों से अनुभव मांगा गया है। लेकिन प्रत्येक अभ्यर्थी के पास अनुभव प्रमाण पत्र होना संभव नहीं है। जिन्होंने हाल ही में पीएचडी पास की है उनके पास कोई अनुभव नहीं है, लेकिन सरकार जानबूझकर अड़चन डाल रही है। रवेल ने कहा कि जहां एक अनुभवी अध्यापक व लेक्चरर शिक्षकों को प्रशिक्षण दे सकता है तो पीएचडी अभ्यर्थी क्यों नहीं दे सकता है।
सरकार की शर्त के चलते अभ्यर्थी आवेदन करने के अधिकार से वंचित हैं। रमणीक शर्मा, विजय धर और अनूप ने कहा कि पढ़ाई करने वाले युवा जब तक अनुभव प्राप्त नहीं करेंगे तब तक उन्हें नौकरी नहीं मिलती है। शोधार्थियों ने कहा कि बिना नौकरी के अनुभव नहीं मिल सकता है। सभी युवाओं को आवेदन करने का मौका देना चाहिए। सरकार ने पहले जो शर्त रखी है उसे हटाना चाहिए। ऐसी स्थिति रही तो युवाओं को आवेदन करने का अवसर नहीं मिलेगा। बेरोजगरी का आंकड़ा बढ़ेगा। डिग्री का मूल्य नहीं रहेगा। उन्होंने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है।