नौ साल की सफा की आंखों के सामने अभी भी 24 मई का वह दिन घूमता रहता है जब उसे ट्यूशन के लिए छोड़ने जा रहे उसके पिता पुुलिसकर्मी सैफुल्ला कादरी की आतंकियों ने घर के पास ही गोली मार कर हत्या कर दी थी।
वह पिता को याद करते हुए टूट जाती है और बताती है कि उसके पिता का सपना था कि वह भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो, वह अपने पिता का सपना अवश्य पूरा करेगी। कहती है कि काश! उसने पिता से ट्यूशन छोड़ने जाने के लिए नहीं कहा होता तो शायद वे आज उसके साथ होते सफा की मां राबिया बताती हैं कि उस गोलीबारी में उनकी बेटी भी घायल हुई थी। उसके हाथ में पट्टी बंधी हुई है अक्सर अपने कमरे की ओर टकटकी लगाए पूछती है मेरे पापा जन्नत में गए होंगे ना ? राबिया की आंखों से आंसू बह रहे हैं वह बताती हैं कि मैं रसोई में थी जब कुछ पड़ोसी खून से लथपथ सफा को लेकर वहां पहुंचे।
सफा की मां राबिया बताती हैं कि उस गोलीबारी में उनकी बेटी भी घायल हुई थी। उसके हाथ में पट्टी बंधी हुई है अक्सर अपने कमरे की ओर टकटकी लगाए पूछती है मेरे पापा जन्नत में गए होंगे ना ? राबिया की आंखों से आंसू बह रहे हैं वह बताती हैं कि मैं रसोई में थी जब कुछ पड़ोसी खून से लथपथ सफा को लेकर वहां पहुंचे। हम उसे एक अस्पताल ले गए जहां मैंने देखा कि मेरे पति को दूसरे स्ट्रेचर पर ले जाया जा रहा है। ऐसा लगा किसी ने मेरे पैरों के नीचे से जमीन खींच ली हो। सफा की हालत ने मुझे और चिंतित कर दिया।
सफा से जब उसकी बांह पर बंधी पट्टी के बारे में पूछा जाता है तो वह बेबाक कहती है, मैं ठीक हूं... कभी-कभी थोड़ा दर्द होता है लेकिन मैं एक बहादुर पुलिसकर्मी की बेटी हूं। मुझे बस इतना पता है कि मुझे अपने पिता के आईपीएस अधिकारी बनने के सपने को पूरा करना है।
इस घटना के बाद से सफा अभी तक स्कूल नहीं गई है। उसकी मां राबिया को समझ नहीं आ रहा कि नौ साल की सफा और आठ साल की बेटी सदा को पूरा मसला कैसे समझाया जाए।
एमएससी तक पढ़ी राबिया बताता है कि मैं बच्चों को बताती थी कि उनके पिता को इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया है, लेकिन मैं इसे बहुत दिनों तक कायम नहीं रख सकी। क्योंकि घर आने वालों का तांता लगा हुआ था। वह बताती हैं कि घटना के कुछ दिनों बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने परिवार से मुलाकात की थी परंतु परिवार की आमदनी के लिए प्रशासन ने अभी तक कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं दिया है। मुझे अपने बच्चों के लिए नियमित आय की जरूरत है। विश्वास है कि पुलिस विभाग निश्चित रूप से इस पर गौर करेगा।
कादरी 2010 में एसपीओ के रूप में हुए थे शामिल हुए थे पुलिस में
पुलिस महानिरीक्षक कश्मर विजय कुमार ने कहा कि पुलिस ने कादिरी की हत्या के लिए जिम्मेदार आतंकवादी की पहचान कर ली है और उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। कादिरी 2010 में एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के रूप में पुलिस बल में शामिल हुए थे और 2014 में उन्हें स्थायी कर दिया गया था।