जेके पीएससी मेें अरनिया की नेहा चौधरी ने हासिल किया 28 वां रैंककमल भगत ने पहले प्रयास में पास की परीक्षाअखबार को बनाया हथियार, सोशल मीडिया से बनाए रखी दूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। क्षेत्र के गांव किलच पुर के निवासी कमल भगत पुत्र सोमदत्त ने जेके पीएससी में 164 वां रैंक हासिल कर परिवार के साथ-साथ पूरे सीमावर्ती क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनके घर में बधाइयां देने वालों का तांता लगा है। हर कोई बेटे की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। कमल भगत ने बताया कि उनका परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था और उनके द्वारा इसी कमजोरी को अपना हथियार बनाया गया और शिक्षा के क्षेत्र में कड़ी मेहनत करने के बाद आज उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।
उन्होंने बताया कि अपनी इस कामयाबी का सारा श्रेय पिता को देते हैं। क्योंकि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने हमें पढ़ाई का अभाव नहीं होने दिया। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा क्षेत्र के ही एक निजी स्कूल से की गई, उसके बाद नवोदय का टेस्ट पास किया और दसवीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय नड से की। उसके बाद ऑल इंडिया स्तर पर ग्रांड दक्षिण स्कॉलरशिप उत्तीर्ण की ओर उसमें जम्मू-कश्मीर राज्य से प्रथम स्थान हासिल किया, और राजस्थान के बूंदी से बाहरवीं की शिक्षा हासिल की, उसके बाद आईआईटी रुड़की से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर मल्टीनेशनल कंपनी में काम किया।
उन्होंने बताया कि प्राइवेट सेक्टर में 12 से 15 घंटे काम करने के बाद उन्हें अहसास हुआ कि जिस स्तर पर रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई की है, उसके चलते उन्हें अपने देश के लिए सिविल सर्विस ज्वाइन करनी होगी। उन्होंने बताया कि एक बड़े सैलेरी पैकेज पर उन्होंने प्राइवेट कंपनी में सेवाएं दी हैं। उसके बाद वह देश सेवा करने के लिए मैदान में जुट गए और हाल ही में उन्होंने असिस्टेंट रजिस्ट्रार की परीक्षा पास करने के बाद उनकी तैनाती कठुआ में की हुई। इस समय वह वहां असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत जोड़ो यात्रा के चलते इस खुशी के पल को बांटने के लिए वह घर पर मौजूद नहीं हैं। वह कठुआ में ही सेवाएं दे रहे हैं जल्द ही छुट्टी मिलने पर घर में सदस्यों के साथ इस कामयाबी का जश्न मनाएंगे।
उन्होंने बताया कि शुरू से ही उन्हें अखबार पढ़ने का शौक था, जिसके चलते उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बताया कि अखबार ही ऐसा माध्यम है, जिससे सिविल सर्विस में कामयाबी हासिल करना आसान हो जाता है। क्योंकि अखबार से जो जानकारी हम प्राप्त करते हैं, उसके लिए कोई और माध्यम है ही नहीं। किताबें हम अपने सिलेबस के अनुसार पढ़ते हैं, लेकिन अखबार से हमें हर वो जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जो सिविल सर्विस में तुरूप का इक्का माना जाता है। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया को जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करते थे। कमल भगत के पिता सोमदत्त ने बताया कि शुरू से ही घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उन्होंने बताया कि वह सिंचाई विभाग में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए वह हल जोत कर ड्यूटी पर जाया करते थे, जिससे घर का गुजर-बसर चलता था। उन्होंने बताया कि कई बार रात को जब वह उठते थे तो उनका बेटा आगे पढ़ाई कर रहा होता था। उसकी कड़ी मेहनत के चलते आज वह इस मुकाम पर पहुंचा है। उन्होंने बताया कि बेटे की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं, और भगवान ने उनकी मेहनत का फल उसे दिया है।
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जेके पीएससी मेें अरनिया की नेहा चौधरी ने हासिल किया 28 वां रैंकजेके पीएससी मेें अरनिया की नेहा चौधरी ने हासिल किया 28 वां रैंकक्षेत्र से 3 अभ्यर्थियों ने मारी बाजी
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। जेके पीएससी की मुख्य परीक्षा का रिजल्ट शुक्रवार को निकल गया। हर अभ्यर्थी अपन परिणाम देखने के लिए उत्सुक थे। वहीं सीमावर्ती क्षेत्र में तीन अभ्यर्थियों ने जेके पीएससी में अपना परचम लहराया है। इसके चलते अरनिया क्षेत्र का नाम रोशन किया है। तीनों अभ्यर्थियों के घरों में खुशी का माहौल है। बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है। विद्यार्थियों के अभिभावक बच्चों की इस कामयाबी को उनकी मेहनत बता रहे हैं।
अरनिया कस्बे के वार्ड नंबर-5 की निवासी नेहा चौधरी पुत्री पुरुषोत्तम लाल ने परीक्षा में 28 वां स्थान हासिल किया है। यह कारनामा उन्होंने पहले प्रयास में ही कर दिखाया है। नेहा चौधरी के पिता सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन हैं। उनकी माता सुदेश कुमारी आंगनबाड़ी वर्कर है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही सिविल सर्विस में जाना उनका सपना था। जो आज साकार हो गया है। उन्होंने बताया कि सिविल सर्विस ही एकमात्र ऐसा प्लेटफार्म है, जिससे वह अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि बारहवीं कक्षा के बाद घरवालों की इच्छा थी कि वह मेडिकल की पढ़ाई करें, लेकिन बचपन से ही उन्होंने अपना करिअर सिविल सर्विस को चुना, हालांकि उसके बाद घर वाले भी उनके इस फैसले के साथ शामिल हो गए। उन्होंने बताया कि उनकी प्राथमिक शिक्षा अरनिया के एक निजी स्कूल से की हुई, और दसवीं तक उन्होंने अरनिया में ही पढ़ाई की। उसके बाद 12वीं कक्षा की तक की पढ़ाई जम्मू के निजी स्कूल से की। स्नातक गवर्नमेंट गांधीनगर कॉलेज फॉर वूमेन से की। 2018 में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली, और उसके बाद सिविल सर्विस की तैयारी करने में लगीं। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान बॉर्डर पर गोलाबारी के चलते कई बार उन्हें रिश्तेदारों के घर जाकर महीनों रुकना पड़ता। इससे उनकी पढ़ाई तो बाधित होती थी, लेकिन उन्होंने सिविल सर्विस में अपने सपने को साकार करने के लिए निरंतर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। इसके चलते आज वह इस मुकाम पर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए वह माता-पिता को पूरा श्रेय देती हैं । क्योंकि उन्होंने कदम-कदम पर पूरा साथ दिया है। उन्होंने बताया कि दसवीं के बाद शिक्षा हासिल करने के लिए उन्हें जम्मू जाना पड़ता था। इसके चलते ज्यादातर समय सफर तय करने में लग जाता था। अगर सीमावर्ती क्षेत्र के बच्चों को अरनिया में ही बेहतर पढ़ाई की सुविधा मुहैया कराई जाए, तो बच्चे हर मुकाम को हासिल कर सकते हैं।
नेहा चौधरी के दादा चुन्नीलाल ने बताया कि कई बार क्षेत्र की समस्याओं को हल कराने के लिए अफसरों के कार्यालय में जाते थे, लेकिन आज उनकी पोती ने खुद अफसर बनकर क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है। क्षेत्र की समस्याओं को हल कराने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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बड़े भाई की प्रेरणा से मिली सफलताबड़े भाई की प्रेरणा से मिली सफलताअखनूर। जेके पीएससी परीक्षा में गांव बलगाडा मैरा मेंदरिया (अखनूर) के फरमान अली पुत्र मास्टर बशीर अहमद चयनित हुए हैं। उनका नाम सूची में 108 नंबर पर है। फरमान अली ने बताया कि यह सफलता उन्होंने पहले ही प्रयास में हासिल की है। परीक्षा के लिए भाई बडे़ भाई से प्ररेणा मिली। भाई ने उन्हें इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए बहुत योगदान दिया।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा अखनूर के महाराजा हरि सिंह स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल अखनूर से पास करने के बाद स्नातक की पढ़ाई एमएएम काॅलेज जम्मू से शिक्षा ग्रहण करके परीक्षा की तैयारी की। पिता मास्टर बशीर अहमद से बचपन से ही शिक्षा के महत्व की जानकारी मिली। दो भाई में तीसरे नंबर पर फरमान अली इस सफलता का श्रेय माता-पिता और भाइयों को देते हैं। उन्होंने कहा कि सिविल अधिकारी की नियुक्ति पर आम और गरीब लोगों की परेशानियों का समाधान करेंगे।
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सुंदरबनी की पांच लड़कियों ने जेके पीएससी में परचम लहरायासुंदरबनी। उपजिला से पांच लड़कियों तथा एक लड़के ने जेके पीएससी में परचम लहराकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उपजिला सुंदरबनी जिसे आमतौर पर शिक्षा के क्षेत्र में यूटी जम्मू-कश्मीर में मिनी केरला के रूप में जाना जाता है। यहां से बच्चे हर क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखते हैं। जिसे पूरी तरह से बरकरार रखते हुए जेकेपीएससी की ओर से जम्मू-कश्मीर सिविल प्रशासनिक सेवा के 2022 के नतीजों में पांच लड़कियों और एक लड़के ने उत्तीर्ण कर उपजिले का नाम रोशन किया है।
उपजिला के गांव ढोक बनियाड की रूपाली सिंह पुत्री रशपाल सिंह, गाई भजवाल की स्मृति शर्मा पुत्री चूनी लाल, गाई मुदवाल की भारती शर्मा पुत्री मोहन लाल, सुंदरबनी नगर की वार्ड न. चार की परीक्षा शर्मा पुत्री चूनी लाल, पहाड़ी क्षेत्र के गांव देवक से साक्षी शर्मा तथा सुंदरबनी के अमित खजूरिया पुत्र धनराज खजूरिया ने जम्मू-कश्मीर सिविल प्रशासनिक सेवा में परचम लहराकर क्षेत्र के नाम रोशन किया है ।
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मेहनत का फल हर हाल में मिलता हैयुवाओं को मेहनत करने का दिया संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
राजोरी। जेके पीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित होते ही राजोरी के कई इलाकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इसमें 12 वां रैंक प्राप्त करने पर दरहाल निवासी माहरुख़ फातिमा ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत और माता-पिता के आशीर्वाद को देते हुए कहा कि मेहनत का कोई अन्य विकल्प नहीं है। जो व्यक्ति मेहनत करता है, उसको उसका फल अवश्य मिलता है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वो सोशल मीडिया का दुरुपयोग न करें, बल्कि जीवन में सफलता पाने के लिए करें। वहीं 134 रैंक पर आने वाले दरहाल निवासी खीरद तनवीर ने भी अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत को देते हुए बताया कि 24 घंटे में 16 से 18 घंटे मेहनत करना, पुस्तकों की डिटेल में स्टडी करना और अख़बार तथा मैगजीन पढ़ने से जो लाभ मिलता है, उससे प्रतियोगी परीक्षा में बहुत लाभदायक होता है। वहीं दरहाल निवासी 136 रैंक प्राप्त करने वाले दरहाल निवासी अजहर अमीन ने बताया कि मेहनत ही सफलता की कुंजी है। मेहनत करते रहो, सफल जरूर हो जाओगे। अजहर ने बताया कि पीएससी परीक्षा पास करना उनकी मंजिल नहीं है, ये तो पहली सीढ़ी है। उनके जीवन का असली मकसद तो आईएएस करके लोगों की सेवा करना और माता-पिता के आशीर्वाद से वो एक दिन आईएएस बन कर अपना सपना साकार करेंगे।
वहीं दरहाल निवासी 175 रैंक पर आने वाली माविश मालिक ने अपनी सफलता को लेकर खुदा का धन्यवाद करते हुए बताया कि वो ऊपर वाला जिसको चाहे उसे नवाज दे, और माता-पिता का आशीर्वाद और कड़ी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है। माविश ने युवाओं से कहा कि वो मेहनत करें तो फल जरूर मिलेगा। वहीं बुद्धल तहसील के दूर दराज के गांव कंथोल से परीक्षा पास करने वाली सीरत बाजी ने बताया कि दिन रात मेहनत करने से नहीं, बल्कि निरंतर पुस्तकों को पढ़ने और एक सही तरीके से गाइड की मदद से ये परीक्षा पास की है। उन्होंने जीवन में सफलता के लिए अभिभावकोें के आशीर्वाद को जरूरी करार देते हुआ कहा कि यदि आप मेहनत करते हैं, तो खुदा का रहम भी आप पर है, और माता-पिता का दुआएं हों तो कोई भी मंजिल आप से दूर नहीं रह सकती। कोटरंका सब डिवीजन के रेहान पीडी निवासी सुशांत शर्मा ने परीक्षा पास करने पर ख़ुशी का इजहार करते हुए कहा कि बचपन से सपना था कि प्रशासनिक सेवा में आना है। कड़ी मेहनत और माता -पिता के आशीर्वाद से आज सपना साकार हो गया है।