अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कश्मीर भाषा और साहित्य में कश्मीरी पंडितों के योगदान पर दो दिवसीय सम्मेलन का आगाज कला संस्कृति और भाषा अकादमी में हुआ। सोमवार को पेपर पढ़ने के दो सत्र के बाद संगीत कार्यक्रम हुआ। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अशोक भान ने कहा कि नई पीढ़ी के लेखकों को सामाजिक विषयों के विभिन्न पहलुओं पर लिखने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
पेपर रीडिंग में डॉ. सोहन लाल, प्रो. वीणा पंडिता, बीएन बेताब, डॉली टिक्कू अरवाल और मोहन कृष्ण कौल मौजूद रहे। दूसरे सत्र में कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की उत्पत्ति और सांस्कृतिक जड़ें, 1990 के बाद कश्मीरी लिपि व युवा कश्मीरी पंडित लेखकों की समस्याएं और सांस्कृतिक संगठनों का योगदान विषय पर पेपर प्रस्तुत किए। प्रो. बीएल जुत्शी, आरएल जौहर, आरएल तलाश, एके नाज़ और वली मोहम्मद असीर ने पेपर पढ़ा।
संगीत कार्यक्रम में रवि भान, राजेश खर, दीपाली वातल और नैना सपरू ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यहां सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएल सराफ, कल्चरल अकादमी सचिव भरत सिंह सहित लोग मौजूद थे।