फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राम ने चलाया बाली पर तीर, रावण ने किया सीता हरण

विज्ञापन
रामगढ़ में रामलीला का मंचन करते कलाकार।
विज्ञापन
रामगढ़। सीमावर्ती गांव केसो मनहासा और स्वांखा में चल रहे रामलीला मंचन में वीरवार को मंच पर दिखायागया सुग्रीव को न्याय दिलाने के लिए श्रीराम योजना तैयार करते हैं। इसी को लेकर दोनों भाइयों बाली-सुग्रीव के बीच युद्ध हुआ। सुग्रीव को राज्य मिला।
विज्ञापन

लीला में रावण ने सीता को खूब समझाया, लेकिन वह नहीं मानीं। हनुमान ने लंका दहन कर रावण को अपनी ताकत का परिचय दिया। स्वांखा स्थित श्री दुर्गा रामलीला में मंचन की शुरुआत सुग्रीव को न्याय दिलाने की लीला से हुई। श्रीराम के कहने पर सुग्रीव ने बाली को ललकारते हुए युद्ध करने को कहा। बाली जोश के साथ आए और सुग्रीव से भिड़ गए। कुछ ही देर में बाली ने सुग्रीव को हरा दिया। इसके बाद घायल सुग्रीव श्रीराम के पास पहुंचते और कहते हैं कि प्रभु आपने बाली पर तीर क्यों नहीं चलाया। इस पर राम कहते हैं कि वे पहचान ही नहीं पाए कि बाली कौन है। इसलिए उन्होंने तीर नहीं छोड़ा। एक योजना के तहत श्रीराम दोबारा से सुग्रीव बाली के बीच युद्ध कराते हैं। इस बार वे सुग्रीव के गले में अपनी माला पहना देते हैं, ताकि उनकी पहचान रहे। इस बार राम ने बाली को तीर मार दिया। तीर लगते ही बाली जमीन पर गिर पड़ा और कराहने लगा। जब श्रीराम सामने आए तो उनसे पूछा कि उसके वध का कारण बताएं? जवाब में राम ने कहा कि जब पृथ्वी पर कोई अनीति करता है तो उसे दंड दिया जाता है।
बाली बोले- जब भगवान के दर्शन हो गए, अब जीना किसलिए, जब राम ने बाली से कहा कि वह उनसे वर मांगे। वर में अगर वह अपने को जीवित रखने की बात कहते हैं तो वह भी हो सकता है। बाली ने कहा कि लोगों को जन्मों लग जाते हैं भगवान के दर्शन पाने को। उसे तो एक जन्म में ही भगवान के दर्शन हो गए हैं। अब जीना किसलिए, इसलिए वे मरना ही पसंद करेंगे। बाली ने अपने पुत्र अंगद का हाथ श्रीराम के हाथ में देते हुए कहा कि अंगद का हाथ अपने हाथ में लो स्वामी, अब अधिक नहीं बोला जाता। बाली जय श्रीराम कहते हुए दम तोड़ देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मंचन के दौरान पंकज रहीयान, अजय रहयान, विजय पडगाल मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें