जम्मू। लोक आस्था का महापर्व छठ का सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन हो गया। पर्व के अंतिम दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए बड़ी संख्या में व्रती परिवार सहित तवी नदी स्थित घाट पर पहुंचे। सूर्य उदय के साथ दर्शन-पूजा और अर्घ्य का क्रम शुरू हो गया। इस दौरान घाट पर भगवान सूर्य व छठी मैया के लोकगीत गूंजते रहे। इस मौके पर व्रत करने वालों ने संतान की रक्षा और परिवार में सुख-शांति की कामना की। इसके अलावा तोफ पुल, राजपुरा चुंगी सहित अन्य स्थानों पर रणबीर नहर किनारे लोग छठ पर्व मनाने के लिए पहुंचे।
सोमवार तड़के तवी नदी के किनारे बड़ी संख्या में छठ व्रती पहुंचे। सूर्य की पूजा के बाद व्रतियों ने कच्चे दूध, जल और प्रसाद से व्रत का पारण किया। खरना के बाद रविवार को छठ पर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया था, जबकि सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-शांति की मंगल कामना की। चार दिवसीय छठ पर्व शहर में धूमधाम से मनाया गया। शहर में अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी तौर पर बनाए गए घाट पर अर्घ्य और पूजा-अर्चना से माहौल भक्तिमय बना रहा।
प्रसाद ग्रहण करने के लिए पहुंचे स्थानीय लोग
जम्मू। त्रिकुटानगर में भी नहर किनारे सोमवार को छठ व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान महिलाओं और बच्चों में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। व्रतियों ने श्रद्घा के साथ छठ मैया की पूजा कर 36 घंटे से जारी उपवास का पारण किया। इस मौके पर घर-परिवार में सुख समृद्घि के लिए कामना की। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस प्रसिद्ध पर्व के प्रति स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता देखी गई। पूजा-अर्चना देखने के साथ उन्होंने ठेकुआ का प्रसाद भी ग्रहण किया। छठ पर्व प्रकृति से जुड़े रहने का पर्व है। इसमें प्राणिमात्र के सुखी जीवन की कामना की जाती है। संवाद