जम्मू। अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। संतान की दीर्घायु, आरोग्य जीवन प्रदान करने की मंगलकामना एवं परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए अहोई माता पार्वती का व्रत एवं पूजन किया जाता है।
कुछ निसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी व्रत करती हैं। इसको महिलाएं निर्जल रहकर करती हैं। शाम को अहोई माता की आकृति गेरु और लाल रंग से दीवार पर बनाकर उनकी पूजा करती हैं। कथा, आरती और मीठे पुए या आटे का हलवा का भोग लगाया जाता है। कुछ माताएं तारों की छांव में तो कुछ चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करती हैं।
अहोई अष्टमी व्रत के विषय में श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि का प्रारंभ 17 अक्तूबर सुबह 9.30 बजे होगा और कार्तिक कृष्ण अष्टमी तिथि का समापन 18 अक्टूबर सुबह 11.58 बजे होगा। चंद्रोदय व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन यह पर्व मनाया जाता है।
17 अक्तूबर को अहोई अष्टमी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं, जिससे यह व्रत और भी शुभता प्रदान करने वाला हो गया है। अहोई अष्टमी पर सिद्धि योग शिव और सिद्ध योग बन रहे हैं। यह पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इन योगों में किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होता है। साफ शब्दों में कहें तो इस योग में किया गया पूजन कार्य का शुभ फल आने वाले समय में निश्चित ही मिलता है।