जम्मू। सनातन धर्म में श्रावण (सावन) महीने का खास महत्व है। श्रावण मास के विषय में महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि कुछ शिव भक्त सौर मास (श्रावण संक्रांति) से श्रावण मास ( शिवपूजन) शुरू करेंगे और कुछ चंद्र मास (श्रावण कृष्ण पक्ष) से, दोनों विधान उत्तम हैं। श्रावण संक्रांति 16 जुलाई को है, अधिकतर शिव भक्त चंद्र मास से शुरू करते हैं और चंद्र मास श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा छह जुलाई को है। इस दिन से चंद्र मास शुरू होगा, श्रावण मास शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन तीन अगस्त को होगा। विशेष बात यह है कि, चंद्र मास के प्रथम और अंतिम दिन सोमवार पड़ रहा है यह एक अच्छा संयोग है, चंद्र माह में इस बार पांच सोमवार होंगे। सावन का महीना ऐसा महीना है, जिसमें छह ऋतुओं का समावेश होता है और शिव धाम पर इसका महत्व सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि सावन चतुर्मास के दिनों में आता है, जब जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु चार माह के लिए विश्राम पर चले जाते हैं और उनके पीछे जगत के पालन-संरक्षण का कार्य भगवान शिव और माता पार्वती संभालते हैं। श्रावण मास में सोमवार या पूरे मास विधिपूर्वक व्रत रखने पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतु फल, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित किये जाते हैं। श्रावण माह के पहले सोमवार से 16 सोमवार के व्रत शुरू होते हैं। ब्यूरो