कथा शुरू होने से पहले कथा स्थल पर पूजा अर्चना करते लोग
ज्यौड़ियां। तहसील के गांव चक भगवाना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथा वाचक सुरेश शास्त्री ने कहा कि मानव के लिए मन की शांति हासिल करने का एकमात्र साधन प्रभु स्मरण है। धन-अर्जन के अलावा हर प्रकार के सुख संसाधनों को एकत्र करने के लिए मानव के पास कई प्रकार के प्रयोजन उपलब्ध हो सकते हैं। इससे मनुष्य को शारीरिक एवं सांसारिक सुख हासिल हो सकता है, परंतु मानसिक एवं अध्यात्मिक शांति प्रभु की शरणागत हुए बिना हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कथा में सम्मिलत संगत से आह्वान किया कि वह बच्चों को मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के साथ-साथ सनातन धर्म-संस्कृति के बारे में भी ज्ञान दें। ताकि उनमें संस्कारों का उत्सर्जन होने के अलावा बुजुर्गों एवं साधु-संतों के प्रति श्रद्धा एवं आदर के भाव जागृत किए जा सकें। उनका कहना था कि हमारी भविष्य की पीढ़ियां समाज तथा राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्पूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके चलते इनके चरित्र निर्माण के लिए हमें अपने उत्तदायित्व को निभाने के लिए हर संभव प्रयत्न करना होगा। संवाद