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जम्मू: महाभारत युद्ध का वृत्तांत सुन भावुक हुई संगत

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संवाद न्यूज एजेंसी
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अरनिया। जंगवाल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को रशपाल शास्त्री ने संगत को महाभारत युद्ध के बारे में बताया। कथा वाचक ने बताया कि महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण शुरू से अंत तक धर्म के शिविर में खड़े रहे। अधर्म का साथ उन्होंने नहीं दिया। जब अर्जुन और दुर्योधन महाभारत युद्ध के लिए श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने के लिए पहुंचे तो अर्जुन श्रीकृष्ण के पांव में खड़े थे, और दुर्योधन उनके सिर की तरफ थे। सहायता मांगने पर अर्जुन ने श्रीकृष्ण से नारायण सेना के बदले खुद श्रीकृष्ण को मांगा, और वह जो पहले ही तय कर चुके थे कि वह महाभारत युद्ध में हथियार नहीं उठाएंगे। उसके उपरांत भी अर्जुन का श्रीकृष्ण पर अधिक विश्वास था, जिसके चलते पांडवों की महाभारत युद्ध में जीत हुई। उन्होंने बताया कि भगवान पर अटूट विश्वास रखने से ही हर कार्य में सफलता मिलती है, और मनुष्य को भगवान की तरफ नतमस्तक रहना चाहिए। अच्छा या बुरा सिर्फ भगवान पर छोड़ देना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन संगत प्रवचन सुनने के बाद आरती में मंत्रमुग्ध हो गई, उसके उपरांत मंदिर कमेटी की तरफ से संगत को प्रसाद दिया गया।
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